तलहटी स्थित गिरिराज के प्रमुख मंदिरों में प्रभु को सर्दी से बचाने के इंतजाम शुरू हो गए हैं। गिरिराज जी को सर्दी से बचाने के लिए अंगीठी जलाई जा रही है वहीं उन्हें रजाई ओढ़ाई जा रही है। गिरिराज जी की प्रसादी भी गर्म तासीर की बनाई जा रही है।
तलहटी में गिरिराज जी की पूजा बाल कृष्ण के रूप में होती है। प्रमुख मंदिरों में शाम को गिरिराज जी के श्रृंगार दर्शन होते हैं। पोशाक के श्रृंगार के बाद गिरिराज जी स्वयं कृष्ण बनकर वंशी बजाते हैं और छप्पन भोग, फूल बंगला मनोरथ होता है। दानघाटी मंदिर के सेवायत रामेश्वर पुरोहित ने बताया कि ब्रज में बालक के भाव में ब्रजवासी गिरिराज जी को पूजते हैं।
सर्दी बढ़ने के साथ ही गिरिराज जी को तापने के लिए अंगीठी रखी जाती है साथ ही तिल के लड्डू, सोंठ की मठरी आदि का भोग लगाया जा रहा है। दूसरी ओर जतीपुरा मुखारविंद मंदिर में शाम ढलते ही गिरिराज जी को रेशमी रजाई ओढ़ाई जा रही है।