मैनपुरी। यादव मतदाताओं को विभाजित करने के लिए बसपा प्रत्याशी ने 26 साल बाद मैनपुरी में एक बार फिर घोसी कमरिया का नारा दिया है। नामांकन करने के बाद बसपा प्रत्याशी शिवप्रसाद यादव यादवों के बीच घोसी कमरिया को आधार बनाकर वोट हमारा राज तुम्हारा का विरोध करने की बात हवा में उछाल रहे हैं। वर्ष 1998 में शिकोहाबाद के रहने वाले पूर्व मंत्री अशोक यादव ने भी घोसी कमरिया का नारा देकर माहौल बदला था। उनको सपा प्रत्याशी बलराम सिंह यादव के सामने हार का सामना करना पड़ा था।
लोकसभा सीट पर यादव मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इनमें 70 प्रतिशत से अधिक मतदाता घोसी जाति से आते हैं। अधिकांश यादव मतदाता सपा समर्थक माने जाते हैं। वर्ष 1998 में भाजपा ने शिकोहाबाद के रहने वाले अशोक यादव को प्रत्याशी बनाया। अशोक यादव ने चुनाव प्रचार ही घोसी और कमरिया के नारे को लेकर किया। चुनाव प्रचार के दौरान घोसी मतदाताओं को उनकी संख्या के आधार पर सपा में भागीदारी नहीं मिलने की बात हर सभा में कही। उनकी बात का मतदाताओं पर असर भी हुआ। उनकी रणनीति के बाद उनको अच्छी सफलता मिली। लेकिन सपा प्रत्याशी बलराम सिंह यादव के सामने 10366 वोटों से हार मिली।
इस बार बसपा ने औरैया जिले के रहने वाले शिवप्रसाद यादव को प्रत्याशी बनाया है। शिवप्रसाद यादव ने 26 साल बाद एक बार फिर जिले में घोसी कमरिया की राजनीति शुरू की है। नामांकन करने के बाद से ही वह यादव बाहुल्य क्षेत्रों में होने वाली हर सभा में घोसी कमरिया की बात कहकर वोट हमारा राज तुम्हारा का विरोध करने के लिए घोसी मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। वह कहते भी हैं कि घोसी मतदाता आखिर कब तक कमरिया नेताओं को जिताए। संख्या के आधार पर उनको भी भागीदारी दी जानी चाहिए। वह कितना कामयाब होंगे यह तो समय बताएगा। लेकिन 26 साल बाद एक बार फिर यादवों के बीच घोसी और कमरिया को लेकर बसपा प्रत्याशी ने विभाजन की कोशिश की है।