चिकित्सा विज्ञानी कुष्ठ रोग की रोकथाम की तैयारी में हैं। राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोबेक्टीरियल रोग संस्थान में माइकोबेक्टीरियम इंडकस ‘प्रानि’ (एमआईपी) वैक्सीन तैयार की जा रही है। रिसर्च लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही इससे इलाज शुरू होगा।
वैक्सीन मरीज और उनके परिवारीजन को दी जाएगी। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से मरीज की हालत में जल्द सुधार होगा। परिजनों में इसके फैलने की आशंका भी कम होगी। इस वैक्सीन से 6-8 साल तक बीमारी के खतरे को टाला जा सकता है। ऐसे में चिकित्सा विज्ञानी चरणबद्ध डोज देने का मन बना रहे हैं। शोध में महत्ती भूमिका निभाने वाले प्रो. गुरुशरण प्रसाद तलवार से ‘प्रा’ और उनके संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी से ‘एनआईआई’ लेकर वैक्सीन का नामकरण ‘प्रानि’ किया गया है। संस्थान निदेशक डा. श्रीकांत त्रिपाठी ने बताया कि रिसर्च की स्टडी को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की कांफ्रेंस में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें विज्ञानी वैक्सीन के प्रयोग पर मंथन करेंगे। फोन पर डा. तलवार ने बताया कि मान्यता मिलने के बाद इससे इलाज शुरू होगा।
यूएमडीटी से इलाज
- कुष्ठ के इलाज में यूनिवर्सल मल्टी ड्रग थैरेपी उपयोग में लाई जा रही है। पूर्व में मोनो थेरेपी थी। चिकित्सा विज्ञानी प्रो. वेंकटेश ने बताया कि अब कुष्ठ मरीजों को तीन तरह की दवाएं दी जाती हैं। कुष्ठ पीबी (दो-तीन चकत्ते वाला मरीज) और एमबी (पांच से अधिक चकते) रहते हैं। पीबी का छह महीने और एमबी का साल भर तक इलाज चलता है।
कम हुई बीमारी
- प्रदेश में कुष्ठ रोगी 2012-13 में 0.72/10000 थी तो 2013-14 में 0.68/10000 रह गई। वहीं आगरा में 0.34/10000 है। स्वास्थ्य विभाग में 2013-14 में 369 मरीजाें का इलाज चल रहा है तो 216 रोगमुक्त हो चुके हैं। वहीं, जालमा में देशभर से तीन हजार मरीज प्रतिमाह इलाज कराने पहुंचते हैं।
ग्रामीण अधिक जागरूक
- कुष्ठ रोग को लेकर ग्रामीण अधिक जागरूक हैं। सामान्यत: खाज-खुजली होने पर भी लोग दिखाने पहुंचते हैं। चिकित्सक इस आदत को बेहतर मानते हैं।
कैसे फैलता कुष्ठ रोग
- अंतर्कोशिकीय वायुजीव माइकोबेक्टीरियम लेप्री (एम लेप्री) से कुष्ठ रोग होता है। एम लेप्री नाक में अधिक पाए जाने की संभावना रहती है। कटे या फिर जख्म होने पर एम लेप्री कोशिकाओं में प्रवेश करता है।
यह करने से रोग नहीं होता
- साथ रहने और खाने से
- कपड़ों के इस्तेमाल करने से
- हाथ मिलाने से
इसकी यह है पहचान
- शरीर पर चकते या फिर धब्बे
- शरीर के हिस्से का सुन्न हो जाना
- संबंधित हिस्से में रक्त संचार की कमी
- हाथ-पैर में टेढ़ापन होना