लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने के लिए अब संभागीय परिवहन कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लखनऊ में परिवहन विभाग के इस साफ्टवेयर पर काम चल रहा है। ये व्यवस्था पहले दौर में ट्रायल के तौर पर कुछ जिलों में लागू होगी। अपेक्षित परिणाम मिलने पर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।
संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में जाने पर सबसे ज्यादा लोगों की भीड़ लाइसेंस वाले काउंटर पर मिलेगी। दलालों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया भी डीएल बनवाना ही है। आरटीओ में पिछले तीन माह से लाइसेंस का काम आनलाइन कर दिया गया है। मारामारी कम नहीं होने से लोगों को अब भी दलालों का ही सहारा लेना पड़ता है। आरटीओ के सूत्रों ने बताया कि जल्द ही लर्निंग लाइसेंस के लिए टेस्ट और फार्म भरने जैसी औपचारिकताएं खत्म होने वाली हैं। साफ्टवेयर बनने के बाद लर्निंग लाइसेंस के लिए बस आनलाइन आवेदन करना होगा। लाइसेंस घर बैठे मिल जाएगा। इसमें टेस्ट की बाध्यता भी नहीं रहेगी। छह माह में ही स्थायी लाइसेंस के लिए आवेदक को आरटीओ में आकर टेस्ट देना होगा। अन्य औपचारिकताएं भी तभी पूरी कराई जाएंगी। एआरटीओ (प्रशासन) ओम प्रकाश का कहना है कि लर्निंग लाइसेंस के लिए नये साफ्वेयर पर काम चल रहा है।
आरसी भी होगी स्मार्ट कार्ड
परिवहन विभाग वाहनों की आरसी को भी स्मार्ट कार्ड के रूप में तब्दील करने की योजना बना रहा है। अगले साल तक स्मार्ट कार्ड की तर्ज पर आरसी भी दी जाएगी।