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जहां भगवान ने हरे ब्रजवासियों के कष्ट, वहीं गायों के कष्ट दूर कर रही ये जर्मन महिला

Tue, 19 Sep 2017 02:09 PM IST
अशोक दुबे/अमर उजाला राधाकुंड (मथुरा)
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राधासुरभि गोशाला की संचालक सुदेवी दासी - फोटो : अमर उजाला
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मथुरा की जिस नगरी में भगवान कृष्‍ण ने एक पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। उसी गिरिराज तलहटी में एक विदेशी महिला ने खुद को कान्हा के चरणों में समर्पित कर दिया है। वे रक्षा करने में जुटी हैं गोवंश की। जर्मनी में अपना घरबार छोड़ दिन रात यहां गोवंश की सेवा को ही अपना उद्दे्श्य बना लिया है। 
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बता दें कि मथुरा में गोवर्धन के राधाकुंड से थोड़ी दूर पर एक गांव है कोन्हई। यहां राधासुरभि नाम की गोशाला में एक विदेशी महिला रोजाना बीमार गोवंश का पालन पोषण करती है। उनका यह काम कई सालों से जारी है। 

राधासुरभि गोशाला की संचालक सुदेवी दासी की गोशाला में 1000 से अधिक बैल, बछड़े और वृद्ध गाय हैं। ये सभी गोवंश किसी न किसी बीमारी या दुर्घटना से जख्मी हुए हैं। यहां कोई गाय देख नहीं पाती तो किसी गाय से चला तक नहीं जाता। इन सब की सेवा सुदेवी दासी बिना किसी स्वार्थ के करती हैं। 
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मूल रूप से जर्मनी की रहने वाली

बता दें कि सुदेवी दासी का का जन्म 2 मार्च 1958 में जर्मनी के बर्लिन शहर में हुआ। इसका मूल नाम फ्रेडरिक इरिन ब्रूनिग है। सुदेवी दासी के अनुसार वे 80 के दशक में एक बार भारत घूमने के लिए आई थीं। तब उम्र करीब 19-20 वर्ष रही होगी। कई देशों की सैर करने के बाद जब वे ब्रज में पहुंची तो फिर यहीं की होकर रह गईं। 

सुदेवी का कहना है कि उन्होंने गोवर्धन के राधाकुंड में गुरु दीक्षा ली। कुछ समय के बाद इनका गाय और बछड़ों से लगाव बढ़ गया। इस सुदेवी ने गोसेवा की ठान ली। तब से आज तक इस प्रकल्प में जुटी हैं।
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घरवालों के बुलाने पर भी नहीं लौटीं

सुदेवी दासी ने बताया कि उनके पिता जर्मनी में एक सरकारी अधिकारी थे। उनको जब अपनी बेटी के कार्य के बारे में पता चला तो उन्होंने भी अपनी पोस्टिंग दिल्ली करा ली। घरवाले बार बार उनसे लौटने की कहते रहे लेकिन वे यहीं की होकर रह गईं। 

सुदेवी दासी हर दिन एंबुलेंस से गोवंश को इलाज के लिए ले जाती हैं। उनके सेवा भाव को देखते हुए लोग अपनी गायों को इनकी गौशाला में छोड़ जाते हैं।  राधासुरभि नाम की इस गोशाला में 50 से अधिक कर्मचारी हैं। इन सभी का परिवार इसी गोशाला से चलता है। गोशाला के खर्च को भी सुदेवी अपनी पैतृक संपत्ति से होने वाली आय से वहन करती हैं। 
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