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खुशखबरः आगरा में मिलेगा दस हजार लोगों को रोजगार, जर्मन कंपनी के साथ होगा जूता निर्यात व्यापार

Wed, 20 May 2020 02:30 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

स्वदेश की जूता निर्यातक कंपनी आई ट्रिक और जर्मनी की कंपनी कासा ऐवर जिम्ब के बीच बड़ा करार
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आई ट्रिक कंपनी के मुख्य अधिशासी अधिकारी आशीष जैन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोविड-19 महामारी के दौर में चीन को जूता कंपनियों ने झटका दिया है। भारत के लिए खुशी की खबर है कि जर्मनी की कंपनी कासा एवर जिम्ब जूता निर्यात कारोबार चीन से समेट कर आगरा में लाएगी। स्वदेश की जूता निर्यातक कंपनी आई ट्रिक और जर्मनी की कंपनी कासा ऐवर जिम्ब के बीच यह करार हुआ है।
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भारत में बनने वाले इस ब्रांड का नाम है वॉन वैल्स जर्मनी- 5 जोन। ताजनगरी में आई ट्रिक कंपनी के मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) आशीष जैन  का अमर उजाला टीम ने साक्षात्कार लिया और उनसे जाना कि किस प्रकार रोजगार के अवसर मुहैया होंगे।

सवालः कंपनी कैसे बनाई
जवाबः फुटवियर को दुनिया में फैशन के तौर पर देखा जाता है। लोग ये नहीं समझते हैं कि पैर शरीर का फाउंडेशन है। पैर शरीर की सभी चीजों की देखभाल के लिए बने हैं। पहले के दौर में मिट्टी पर नंगे पैर चलते थे उस वक्त पैर इसी क्रिया में ढल गए थे लेकिन आज हर जगह कंक्रीट का जाल फैला हुआ है। जूते का फंक्शन शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए भी होता है। नए दौर में आने पर फुटवियर को लोग सिर्फ शौक के तौर पर देखते हैं। इसी सोच को लेकर हेल्दी फुटवियर की कंपनी बनाई गई। 
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सवालः हेल्दी जूता बनाने का आईडिया कहां से आया
जवाबः हम हेल्दी फूड की बात करते हैं लेकिन हेल्दी फुटवियर की नहीं करते हैं। देश में कोई भी जूता ऐसा नहीं है जिनसे शरीर स्वस्थ्य रहे। जूता शरीर को स्वस्थ्य रखने का एक अहम कारक है। फैशन की तरह न लेकर इसे तकनीक के तौर पर देखा जाए तो बेहतर है। यहीं सोचकर हेल्दी जूता बनाने का विचार आया। वॉन वैल्स जर्मनी- 5 जोन के जूते चलने के दौरान पैरों की अच्छी तरह से मसाज करते हैं। इन जूतों के बारे में लोगों ने भारत में नहीं सोचा, उसी चीज को ध्यान में रखते हुए फुटवियर ब्रांड के साथ हेल्दी फुटवियर क्रिएट किया। डायबिटिक लोगों के लिए देश में डायबिटिक फुटवियर भी बनाए जाते हैं। 

सवालः इसके लिए क्या पढाई की
आईआईएम (भारतीय प्रबंधन संस्थान) इंदौर से (मास्टर ऑफ बिजिनेस एडमिनिस्ट्रेटर) एमबीए किया। परिवार पिछले तीस सालों से फुटवियर इंड्रस्टी में हैं। बिजनेस में पढ़ाई करने के बाद जर्मन कंपनी के साथ अनुबंध किया और नई तकनीक को भारत में लाने की कोशिश की है।

सवालः आगरा को ही क्यों चुना
आगरा के निवासी है तो शहर का विकास हो और लोगों को रोजगार मिले ये इच्छा है। आगरा जूता उद्योग के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्घ है। यहां कर्मचारियों की भी उपलब्धता है। इसलिए आगरा में इस इंड्रस्टी को लाने की पूरी कोशिश है। 

सवालः और कौन दे रहा साथ
इस कंपनी के साथ पत्नी पूर्वा जैन भी सहयोग दे रही हैं। पूर्वा ने आईआईएम इंदौर से ही एमबीए किया है। पत्नी आई ट्रिक कंपनी में डायरेक्टर हैं और चीफ मार्केटिंग ऑफीसर भी हैं।
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आशीष जैन ने बताया कि सबसे पहले जूता निर्माण में स्वदेशी वस्तुओं पर जोर दिया जाएगा। वहीं एक अन्य खास बात है कि जर्मन तकनीक का भारत में पहली बार इस्तेमाल किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि हड्डी रोग विशेषज्ञ और नेचुरोपैथ डॉ. वाल्टर मौच ने 30 साल पहले रिफ्लेक्सोलॉजी साइंस को आधार बनाकर आविष्कार किया था। यह जूता दुनिया के 80 देशों में पेटेंट है और पहना जाता है। इससे दुनिया के 10 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। जूता पैर, घुटना और कमर के दर्द में राहत पहुंचाता है। जोड़ों और मांसपेशियों की सुरक्षा करता है ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो। कंपनी डायबिटिक फुटवियर भी बनाती है। 


भारत में कंपनी के आने से करीब 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। करोड़ों रुपये का व्यापार होगा। उत्तर प्रदेश सरकार कंपनी को सहयोग के लिए तैयार है। करार के मुताबिक आई ट्रिक कंपनी इस जर्मनी कंपनी का माल बनाएगी। हालांकि उस माल पर क्वालिटी कंट्रोल जर्मन कंपनी का ही रहेगा। आई ट्रिक कंपनी द्वारा फैक्टरी को आगरा में ही लगाने का प्रयास है। भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें मदद मिले।

भारत में आई ट्रिक कंपनी पहले से ही इस जर्मनी कंपनी का माल वन विलेज जर्मन के नाम से बना रही है। कासा एवर जिम्ब भारत के अलावा चीन में भी यह काम कर रही है। अब चीन से यह काम समेट कर भारत में स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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