सीडीएस जनरल बिपिन रावत फाइल फोटो
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पुलवामा हमले का जवाब देने की तैयारियों के सिलसिले में सीडीएस बिपिन रावत करीब ढाई वर्ष पूर्व आगरा आए थे। जवानों में जोश भरने के साथ ही उन्हें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का आदेश दिया था। सीडीएस रावत उस समय सेना प्रमुख थे और सैन्य क्षेत्र में उन्होंने जवानों के साथ काफी समय बिताया था।
बुधवार दोपहर तमिलनाडु में कुन्नूर के करीब हुए हैलीकॉप्टर क्रैश हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत व उनकी पत्नी समेत 13 लोगों का निधन हो गया। इस हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। ताजनगरी में भी डिफेंस स्टाफ के साथ ही आमजन भी गमगीन हैं। सीडीएस जनरल बिपिन रावत 11 मार्च 2019 को ताजनगरी आए थे। उस समय वे सेना प्रमुख थे।
यह वो समय था जब पुलवामा हमले (14 फरवरी 2019) का बदला लेने से लिए पूरा देश एकजुट था। सीडीएस रावत ने यहां पैरा ब्रिगेड के जवानों से मुलाकात की थी और उन्हें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का आदेश दिया था। आगरा सैन्य क्षेत्र में ब्रिगेड के प्रशिक्षण के उच्चतम मानकों और भारतीय वायुसेना के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए सीडीएस रावत ने आगरा बेस पर उस समय तैनात रहे अधिकारियों की तारीफ भी की थी।
देश के लिए बड़ी क्षति
सीडीएस बिपिन रावत का असमय जाना देश के लिए बड़ी क्षति है। वे तीनों ही सेनाओं के संयुक्त रूप से कार्य करने के पक्षधर थे। चीन की बढ़ती हिमाकत पर उन्होंने अंकुश लगाया था। पाकिस्तान को उसी की जुबान में जवाब दिया था। उनके जाने से डिफेंस स्टाफ में शोक की लहर है।
- कर्नल (रिटायर्ड) अपूर्व त्यागी