कासगंज। गंगा का उफान थमने का नाम नहीं ले रहा। लगातार जलस्तर में वृद्धि बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए मुसीबत बनी हुई है। बाढ़ के पानी से टापू बने ग्रामीण इलाकों में जलस्तर और बढ़ गया है। खादर के खेतों व खादर में कई कई फुट पानी भरा हुआ है। किसानों की मक्का, बाजरा की फसलें पीली पड़कर बर्बाद हो गई हैं। फसलों की बर्बादी देख किसान घबराए हुए हैं। जिले में गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार को दो सेंटीमीटर और बढ़ गया। गंगा खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
बाढ़ का प्रभाव जिले में पिछले एक माह से बना हुआ है। बाढ़ के प्रभाव ने किसानों व ग्रामीणों का काफी नुकसान किया है। सर्वाधिक नुकसान फसलों का है। बाढ़ का पानी न उतरने के कारण प्रशासन किसानों की फसलों की क्षति का आकलन नहीं कर सका है। एक माह से अधिक मक्का बाजरा के जिन खेतों में पानी भरा हुआ है उन खेतों में फसलें पूरी तरह सड़कर पीली पड़ गई हैं। तमाम फसलें खेतों में हीं गिर गईं जिससे चारा भी नहीं बन सकेगा।
धान की फसल को भी पचास फीसदी से अधिक की क्षति है। गंगा की बाढ़ से पटियाली गांव मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती, अलीपुर भकुरी, रिकहरा, गठैरा, नरदौली पुख्ता सहित आस पास के ग्रामीण के प्रभावित हैं। वहीं सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, शहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे सहित आस पास के तमाम गांव में पानी भरा हुआ है।
सोरोंजी क्षेत्र के उढ़ेर के किसान शंकर पाल ने बताया कि हसनपुर, नगरिया फार्म, उढ़ेर, दतलाना, लहरा सहित अन्य इलाकों में काफी पानी भरा हुआ है। पानी लगातार बढ़ रहा है। वहीं नगला नरपत के अशोक कुमार ने बताया कि एक महीने से अधिक का समय होने के बाद भी अभी बाढ़ से राहत नहीं मिल सकी है। स्थिति काफी बिगड़ गई है।
हसनपुर से कछला तक सड़क के दोनों ओर भरा है पानी
मथुरा-बरेली मार्ग पर हसनपुर गांव से कछला तक सड़क के दोनों ओर खेतों में कई कई फुट पानी भरा हुआ है। खेतों की फसलें भी खराब हो गई हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी के एक प्लांट में भी पानी भरा हुआ है और मशीनें भी पानी में डूब गई हैं।
कछला घाट पर अंत्येष्टि स्थल भी पानी से घिरा
कछला गंगाघाट के दक्षिणी किनारे पर काफी पानी आश्रमों और भारत विकास परिषद के भवन तक फैला हुआ है। अंत्येष्टि स्थल के चबूतरा के पास तक गंगा की बाढ़ का पानी भरा हुआ है। वहीं अंत्येष्टि स्थल की ओर जाने वाले वाले मार्ग के मैदान में पानी है। इससे वाहनों के निकलने में दिक्कतें हो रही हैं। घाट पर बनी झोपड़ियों व अस्थायी दुकानों तक पानी की दस्तक है।
बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 180717 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 180252 क्यूसेक
नरौरा बैराज से- 181902 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.62 मीटर के निशान पर
बाढ़ का स्तर
- डेंजर लेवल- 162.40 मीटर के निशान पर
- हाईफ्लड लेवल- 162.91 मीटर के निशान पर