आगरा में तीन करोड़ रुपये खर्च करने पर भी शमसाबाद मार्ग की इंदिरापुरम कॉलोनी के 25 हजार लोगों को गंगाजल नहीं मिल पाया। अंधेरगर्दी का आलम यह है कि जल निगम ने पांच साल पहले भूमिगत जलाशय तो बना दिया लेकिन पाइप लाइन डाली ही नहीं। अब जलाशय जर्जर हो गया है। इंदिरापुरम के लोगों का कहना है कि पानी मिलता तो काम आते, निगम ने ये तीन करोड़ रुपये बर्बाद किए हैं।
पांच साल पहले भी इंदिरापुरम कॉलोनी का यह प्रोजेक्ट तब बना था, जब लोगों ने हंगामा-प्रदर्शन किया था। भूमिगत जलाशय के बाद यहां पाइप लाइन डाली जानी थी और फिर घर-घर कनेक्शन दिए जाने थे। जलाशय बन जाने के बाद काम आगे ही नहीं बढ़ा। पानी की जरूरत पर घर-घर सबमर्सिबल पंप लगते चले गए। मजबूरी में लोगों ने खुद ही पानी का इंतजाम किया। पीने का पानी का कैंपर खरीदते हैं और जिनके घर में सबमर्सिबल नहीं है, वे अन्य काम के लिए आसपास से पानी लाते हैं।
जलाशय की दीवार ढहने के कगार पर
स्थानीय निवासी मीना शर्मा ने बताया कि इंदिरापुरम कॉलोनी को आगरा विकास प्राधिकरण में 30 साल पहले बसाया था लेकिन तब पानी की टंकी में ट्यूबवेल लगाकर सप्लाई दी जा रही थी। यह खारा होने के साथ-साथ इसमें फ्लोराइड की मात्रा काफी ज्यादा है। गंगाजल के लिए बनाया गया भूमिगत जलाशय 5 साल में ही जर्जर हो चुका है।