कासगंज। कभी इस जिले के लिए जीवनदायिनी बनीं बूढ़ी गंगा के खत्म हो चुके अस्तित्व को अब फिर से संवारा जा रहा है। डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने बूढ़ी गंगा को जीवंत बनाने की मुहिम श्रमदान के माध्यम से शुरू कराई है। मुहिम की शुरुआत बुधवार से हुई। लोग उत्साह और जोश के साथ श्रमदान में जुटे दिखे।
जिले में 118 किलोमीटर लंबी बूढ़ी गंगा की धारा में एक साथ सफाई अभियान बुधवार सुबह 6 बजे से शुरू किया गया। सोरों, सहावर, गंजडुंडवारा, पटियाली विकासखंड क्षेत्र में बूढ़ी गंगा के किनारे लोग श्रमदान को पहुंचे। सभी सरकारी विभागों के अफसर, चिकित्सक, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी महिलाकर्मी पूरे उत्साह और जोश के साथ सफाई अभियान में जुटे रहे। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह को इस पूरे कार्यक्रम का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। सोरों से लेकर पटियाली तक श्रमदान से बूढ़ी गंगा में बदलाव साफ दिखाई दे रहा था।
400 वर्ष पूर्व महमूदपुर से निकलती थी धारा
बूढ़ी गंगा का स्वरूप 400 वर्ष से अधिक पुराना है। गंगा की धारा सोरों के महमूदपुर से निकलती थी जो पचलाना, अल्लीपुर, सिरावली, नगलादल, डेलासराय, कुमरऊआ आदि गांव होती हुई तीर्थनगरी सोरों में होती हुई सहावर, पटियाली इलाके की ओर जाती थी। यही धारा फर्रुखाबाद जनपद की ओर निकल जाती थी। 60 ग्राम पंचायतें बूढ़ी गंगा से जुड़ी हैं। जिले में गंगा की कुल लंबाई 118 किलोमीटर है।
सफाई से रुकेगी तबाही
कासगंज। बरसात और बाढ़ के दौरान बूढ़ी गंगा में काफी पानी आ जाता है, लेकिन गंगा की धारा साफ न होने के कारण और अतिक्रमण होने से कम पानी में ही गंगा अपना प्रभाव दिखाने लगती है। पानी बहने के लिए समुचित स्थान नहीं मिलता जिससे गंगा की धारा तबाही का काम करने लगती है। गंगा की धारा सुदृढ़ होते ही तबाही रुकेगी और गांव में आर्थिक उन्नति आएगी।