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जीवनदायिनी रहीं वृद्ध गंगा की धार को अब मिलेगा नया जीवन

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कासगंज। कई दशकों से अस्तित्व खो चुकी गंगा की धारा को फिर से जीवन देने की श्रमदान के माध्यम से अनूठी पहले आज बुधवार से शुरू होगी। इसमें 118 किलोमीटर गंगा की धारा में एक साथ सफाई की जाएगी।
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जिले में बूढ़ी गंगा का अस्तित्व सदियों पुराना बताया जाता है। वेदों, पुराणों में भी बूढ़ी गंगा का जिक्र आता है। सोरों के कई धार्मिक स्थल, पुरानी झीलें, संतों के आश्रम प्राचीन समय बूढ़ी गंगा की समृद्धता की दुहाई देते हैं। समय के साथ साथ पिछले कई दशकों से बूढ़ी गंगा का अस्तित्व समाप्त हो गया और बरसात के समय में ही पानी नजर आता था।
बुधवार से गंगा को जीवंतता प्रदान करने के लिए श्रमदान का कार्य शुरू होगा। बड़ी मुहिम चलाकर श्रमदान के लिए 25 हजार लोगों का कारवां तैयार किया गया है जो सुबह 6 बजे से श्रमदान करके बूढ़ी गंगा की सफाई करेगा। जिले भर के प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, शिक्षिकाएं, चिकित्सक, जनप्रतिनिधि श्रमदान में हिस्सा लेंगे। वहीं जॉब कार्डधारक मनरेगा मजदूर भी सफाई का कार्य करेंगे।े
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बूढ़ी गंगा को जीवंत बनाना बेहद जरूरी है। यह श्रमसाध्य कार्य है। जन सहभागिता के माध्यम से ही इसको पुराना स्वरूप दिया जा सकता है। क्योंकि जब लोगों का श्रम इसमें लगेगा तो वे जागरूक रहेंगे। भविष्य में भी गंगा की धारा को मैला नहीं करेंगे। 25 हजार लोग श्रमदान करके गंगा को जीवंत बनाएंगे। हर किसी को इसमें सहयोग करके मिसाल कायम करनी चाहिए। चंद्र प्रकाश सिंह, जिलाधिकारी।
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