आगरा। गंगा दशहरा का पर्व 25 मई है। पर्व पर गंगा और यमुना नदी में स्नान की परंपरा है लेकिन जिले में यमुना का पानी नहाने लायक नहीं रह गया है। सीवेज और कचरा डालकर यमुना नदी को कूड़ादान बना दिया गया है। घाटों पर गंदगी के ढेर हैं तो 180 एमएलडी सीवर और औद्योगिक रसायन कई नालों के जरिये मनोहरपुर से ताजमहल के बीच यमुना में मिल रहे हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में प्रदेश सरकार ने यमुना नदी में 31 मार्च तक सभी नालों के जरिये सीवर और गंदा पानी रोकने का शपथपत्र दाखिल किया था। इसके बावजूद नमामि गंगे योजना के तहत अब तक एसटीपी और सीवर लाइन का काम पूरा न होने से हर दिन 180 एमएलडी से ज्यादा सीवर और नालों का गंदा पानी यमुना में पहुंच रहा है। भैरो नाला, वाटरवर्क्स नाला और मंटोला नाला के साथ 36 छोटे-बड़े नाले यमुना को जहरीला बना रहे हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यमुना नदी के पानी की जांच की तो यह सिंचाई और मछली पालन के साथ सिर्फ औद्योगिक उपयोग के लायक ही बचा है। कैलाश घाट के मुकाबले ताजमहल पर यमुना नदी का पानी लगभग दोगुना प्रदूषित है।
मथुरा के शाहपुर में सबसे मैली यमुना
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में सबसे ज्यादा यमुना नदी में शाहपुर मथुरा में प्रदूषण है। यहां कॉलिफॉर्म की मात्रा 94000 है, जबकि डाउनस्ट्रीम में मथुरा में ही यमुना में यह 47000 पर है। आगरा तक आते-आते यमुना नदी में मथुरा के मुकाबले प्रदूषण कम होता है लेकिन इसकी गुणवत्ता में ज्यादा सुधार नहीं है। सबसे खराब गुणवत्ता का पानी आगरा और मथुरा में ही है। यह आंकड़े मार्च के अंत के हैं। अप्रैल और मई के पानी के सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकी है। यमुना में पानी की मात्रा कम होने से प्रदूषण की मात्रा और सांद्रता और बढ़ी है।
आगरा और मथुरा में ऐसा मिला यमुना जल
जगह डीओ बीओडी कॉलिफार्म फीकल कॉलीफार्म
बटेश्वर 6.90 8.40 84000 1700
ताजमहल 5.80 8.80 22000 4700
कैलाश 6.40 8 13,000 3100
मथुरा शाहपुर 5 14.20 94000 23000
डाउनस्ट्रीम 7 9.80 47000 20000
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नदी का पानी काला और गंदा
- गंगा दशहरा पर ताजमहल के पीछे दशहरा घाट पर मेला लगता था। उसका नाम ही गंगा दशहरा पर स्नान के लिए पड़ा है लेकिन यहां पानी नहाने लायक नहीं है। सबसे खराब गुणवत्ता वहीं है, जहां केवल नालों के जरिये सीवर और औद्योगिक कचरा पहुंच रहा है। नदी का पानी एकदम काला और गंदा है। - डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद
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अफसरों ने नहीं सीखा सबक
- मंटोला, भैरो नाला समेत नालों से यमुना में सीवर और औद्योगिक कचरा गिर रहा है, जिसे रोका नहीं गया। 59 करोड़ रुपये का जुर्माना लगने के बाद भी अफसरों ने कोई सबक नहीं सीखा। जब अफसर ही यमुना नदी का खत्म करने पर तुले हैं तो नदी को जिंदा कौन करेगा। - डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ, याचिकाकर्ता एनजीटी
नालों की सिल्ट यमुना में डाली
यमुना किनारे भैरो नाला और मोतीगंज के पास के नालों की सफाई के दौरान नगर निगम के कर्मचारियों ने सिल्ट यमुना में ही बहा दी। पार्षद रवि बिहारी माथुर ने बताया कि नालों की सफाई के लिए नगर निगम अधिकारियों ने चेन मशीन की जगह कर्मचारी लगाए, जिन्होंने प्लास्टिक कचरा और सिल्ट को नाले में ही बहाकर यमुना में डाल दिया। यमुना नदी से पहले नाले के टेल पर लगा गेट गल कर नष्ट हो गया है। इससे कचरा सीधे यमुना में पहुंच रहा है। एनजीटी ने इस पर रोक लगा रखी है।