Ganga Dussehra 2024: गंगा दशहरा का पर्व 16 जून को है। ऐसी मान्यता है कि देव नदी गंगा इसी दिन स्वर्ग से धरती पर आईं थीं। उस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी। हर साल इस तिथि पर गंगा दशमी का पर्व मनाया जाता है। इसे गंगा दशहरा भी कहते हैं। पं. सुभाष चंद्र शास्त्री बताते हैं कि स्कंद पुराण में गंगा दशहरा का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। कहते हैं कि गंगा के दर्शन मात्र से पापों से मुक्ति मिल जाती है।
खूब उड़ेंगी पतंगें
गंगा दशहरा पर्व पर पतंग उड़ाने की भी मान्यता है। बाजार में पतंगों की दुकानें सज चुकी हैं। कागज की तुलना में पॉलिथीन की बनी पतंगें ज्यादा नजर आ रही हैं। सबसे ज्यादा दुकानें सदरभट्टी में हैं। यहां छोटे-बड़े आकार की रंग-बिरंगी पतंगें उपलब्ध हैं। चरखी, धागा और मांझा भी हैं। शाहगंज निवासी विकास ने बताया कि बचपन में बहुत पतंगें उड़ाईं, अब पर्व के बहाने ही सही एक दिन पतंग उड़ा लेते हैं।
क्या न करें
- गंगा दशहरा पर तामसिक भोज, विचार और व्यवहार से दूर रहें।
- भिक्षुक दरवाजे पर आए तो उसे खाली हाथ न लौटाएं।
- न तो किसी विवाद में पड़ें, न ही क्रोध करें और न ही किसी का अपमान।
- मानसिक रूप से भी किसी के प्रति गलत विचार मन में न लाएं।
क्या करें
- गंगा दशहरा पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
- गंगा नदी में स्नान करें। यदि नहीं जा सकते तो घर में ही बाल्टी के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- दान का विशेष महत्व है। इस दिन पानी से भरा हुआ घड़ा, सुराही या कलश का दान करें।
- रसदार फल जैसे तरबूज, खरबूजा, नारियल आदि का दान करना चाहिए।
गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 16 जून को गंगा दशहरे पर दशमी तिथि सुबह 2.32 बजे ो शुरू होकर 17 जून को सुबह 4.43 तक रहेगी। हस्त नक्षत्र पूर्वाह्न 11.13 तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य अनीता पाराशर के अनुसार इस साल गंगा दशहरा पर कई शुभ योग बन रहे हैं। सुबह 5:23 बजे से लेकर 11:13 बजे तक अमृत सिद्धि योग है। इसके साथ-साथ वरीयान योग रात 9:03 मिनट तक है। इसके अलावा रवि योग का भी बन रहा है जो दिनभर रहेगा। ये तीनों ही योग पूजा-पाठ और दान पुण्य के लिए उत्तम होते हैं।
गंगा दशहरा की पूजा विधि
गंगा दशहरा पर ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करें।
इसके बाद साफ वस्त्रों का धारण करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
इस शुभ दिन पर गंगा मां के साथ-साथ शिव जी की पूजा करने का भी विधान है।
इस दौरान गंगा स्त्रोत का पाठ करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
पूजा के बाद आप जरूरतमंद लोगों को दान कर सकते हैं।