आज गणेश चतुर्थी है। इस दिन घर-घर गणपति की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा है। ब्रज में यह परंपरा पिछले कुछ सालों में तेजी के साथ बढ़ी है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार गणेश चतुर्थी के दिन हस्त नक्षत्र का योग बन रहा है। इस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। इस दौरान पृथ्वी तत्व की राशि यानी कन्या राशि रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अद्भुत संयोग और गणपति की कृपा से पृथ्वी पर चल रहे कोरोना संक्रमण समेत सभी संकटों से मुक्ति मिल जाएगी।
इस बार कोरोना संक्रमण के चलते श्रद्धालु घरों में ही गणपति पूजन कर सकेंगे। सार्वजनिक स्थानों पर उत्सव मनाने की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है। ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि को चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए।
मान्यता है कि चंद्रदर्शन से किसी प्रकार का कलंक लगता है। भगवान श्रीकृष्ण को भी इसका कलंक लगा था। भगवान श्रीगणेश जी का पूजन 2 दिन से 10 दिन का होता है। इसलिए दस बाद उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति का विसर्जन किया जाएगा।
सरल है चतुर्थी की पूजन विधि
गणपति जी की पूजा बेहद सरल मानी जाती है। इस दिन मिट्टी के गणपति विराजमान किए जाते हैं। मान्यता है कि हमारा शरीर पंचतत्व से बना है और पंचतत्व में ही विलीन हो जाता है। सिंदूर लगाएं, दूर्वा चढ़ाएं, लाल पुष्प चढ़ाएं, प्रसाद में मोदक अर्पित करें, आरती करें और गणेश जी को पंचोपचार पूजन करें, इससे गणेश जी प्रसन्न होते हैं।
आज न करें चंद्र दर्शन
मथुरा के गणेश टीला स्थित सिद्धि विनायक मंदिर के पुजारी देवकीनंदन चतुर्वेदी ने भक्तों से घर पर ही रहकर फेसबुक के माध्यम से दर्शन करने की अपील की है। दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि 22 अगस्त को श्री गणेश चतुर्थी पर गणपति महाराज की पूजा-अर्चना करें। उपवास, स्नान, दान, गणपति पूजन के बाद लड्डू का प्रसाद आदि से सौ गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन चंद्र दर्शन नहीं करें, जिससे झूठा कलंक लगता है।