आगरा रोड स्थित खादी की दुकान पर एक शर्ट की कीमत एक हजार रुपये से शुरू होकर चार हजार रुपये तक है। जबकि बाजार में अन्य कपड़े इससे सस्ते हैं। इसके चलते अब खादी केवल राजनेताओं तक ही सिमटकर रह गई है। इससे बिक्री भी काफी कम हो गई है।
रोजगार को भी लगा झटका
खादी ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार जिले में सूत कातने से लगभग पांच सौ लोगों को रोजगार मिलता था। इतना ही नहीं इस काम में बुजुर्ग अधिक संख्या में शामिल थे। इससे उनकी आजीविका चलती थी। जिले में सूत कातने का काम बंद होने के बाद इन लोगों से ये रोजगार भी छिन गया।
जिला खादी ग्रामद्योग अधिकारी आरजी गौतम ने बताया कि जिले में सूत कातने का काम पूरी तरह बंद हो चुका है। आलीपुर खेड़ा में संचालित आखिरी खादी आश्रम में भी पांच साल पहले काम बंद हो चुका है। अब जिले में कहीं भी चरखे से सूत कातने का काम नहीं हो रहा है।