आगरा-टुंडला से जुड़े रेलवे के अधिशासी अभियंता (निर्माण) पन्ना लाल शैलानी की गिरफ्तारी के बाद रेलवे के विभागों में चल रही कमीशनखोरी की बात साफ हो गई है। सूत्रों की मानें तो रेलवे के हर काम में ठेकेदारों को कमीशन देना ही पड़ता है। इसके बिना भुगतान होना मुश्किल होता है। सबसे ज्यादा कमीशनखोरी निर्माण कार्यों के टेंडर और मेंटीनेंस के कार्यों में ली जाती है।
पारदर्शिता का दावा करने वाले रेल विभाग में कैटरिंग के ठेके, स्टालों के आवंटन में भी कुछ चुनिंदा कैटरिंग ठेकेदारों का कब्जा है। एक बड़ी फर्म के ठेकेदार ने तो छद्म नाम से कई फर्म बना ली हैं। आगरा मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर इस फर्म के कई खानपान के स्टाल हैं। इतना ही नहीं कई ट्रेनों में भी इसी फर्म की कैटरिंग है। यह बात अलग है कि इस फर्म ने छद्म नाम से कई फर्म खोल रखी हैं। इसकी जानकारी रेलवे अधिकारियों को है, लेकिन अनदेखी की जाती है।
पार्सल विभाग का घपला भी दो साल पहले सीबीआई की एंटी करप्शन विंग ने पकड़ा था। आगरा फोर्ट के तत्कालीन मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक को जेल भेजा गया था। स्टेशनों की पार्किंग के ठेके घाटे में चलने के कारण प्राइवेट ठेकेदारों को उठाए जाते हैं। पार्किंग में ओवरचार्जिंग की शिकायतें आती हैं, लेकिन ठेकेदारों को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया जाता है।
तत्काल कोटे में लिपिकों की मिलीभगत से कालाबाजारी की शिकायतें आती हैं। कई दफा रेलवे की विजिलेंस चेकिंग करती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया जाता है। विजिलेंस की टीम ने कई साल में इक्का- दुक्का कार्रवाई की हैं। इस संबंध में आगरा मंडल के वाणिज्य प्रबंधक डॉ. संचित त्यागी का कहना है कि शिकायत होने पर कार्रवाई की जाती है। कुछ माह पहले ही आगरा फोर्ट स्टेशन के एक अधिकारी को अनियमिताएं बरतने पर निलंबित किया गया था।