पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगी आग अब सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच गई है। ईंधन के दाम बढ़ने से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) महंगी हुई है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के जरूरी खाद्य पदार्थों पर पड़ा है। महज एक महीने के भीतर आटा, दाल, चीनी से लेकर खाना पकाने वाले तेल की कीमतों में उछाल आया है। इस अचानक बढ़ी महंगाई ने त्योहारी सीजन से पहले ही आम जनता के घरों का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
बाजार के ताजा आंकड़ों और थोक व फुटकर भाव पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा रुलाने वाला उछाल खाने के तेल (सरसों) और रिफाइंड में देखने को मिला है। एक महीने पहले 130 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला सरसों का तेल अब 150 रुपये के स्तर को छू चुका है। वहीं, रिफाइंड के दाम में भी 11 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा गरीब और मध्यम वर्ग की थाली का मुख्य हिस्सा माने जाने वाली दालें, आटा, मैदा और चीनी भी महंगे हो गए हैं।
किराना व्यापारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि पीछे से ही माल महंगा आ रहा है और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ने से कीमतों में यह वृद्धि लाजमी है। जन प्रहरी संस्था संयोजक नरोत्तम सिंह का कहना है कि लगातार बढ़ रही इस महंगाई के कारण सीमित आय वाले परिवारों के लिए महीने का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। लोगों को अब अपनी बचत में कटौती करनी पड़ रही है या फिर जरूरी सामान की खरीदारी सीमित करनी पड़ रही है। जनता अब सरकार से इस बेलगाम महंगाई पर लगाम कसने की उम्मीद कर रही है।
खाद्य पदार्थों का महंगाई मीटर
| सामग्री |
एक महीने पहले का भाव (₹) |
आज का भाव (₹) |
कितनी हुई वृद्धि (₹) |
| सरसों का तेल |
130 /ली. |
150 /ली. |
20 रुपये |
| रिफाइंड |
152 /किग्रा. |
163 /किग्रा. |
11 रुपये |
| दाल अरहर |
106 /किग्रा. |
110 /किग्रा. |
4 रुपये |
| दाल चना |
60 /किग्रा. |
70 /किग्रा. |
10 रुपये |
| दाल मसूर |
67 /किग्रा. |
70 /किग्रा. |
3 रुपये |
| चीनी |
45 /किग्रा. |
47 /किग्रा. |
2 रुपये |
| आटा |
35 /किग्रा. |
38 /किग्रा. |
3 रुपये |
| मैदा |
30 /किग्रा. |
32 /किग्रा. |
2 रुपये |
नोट: बाजार और मंडी के अनुसार फुटकर कीमतों में मामूली बदलाव संभव है।