हौसले अगर बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो तंगहाली और मजबूरियां भी घुटने टेक देती हैं। इसे सच कर दिखाया है अजीतपुर की शशि कुमारी ने। एक दौर ऐसा था जब शशि के घर में आर्थिक तंगी के कारण खाने के निवाले बमुश्किल मिल पाते थे। पति दीपक कुमार की मजदूरी से घर चलाना मुश्किल था।
शशि ने भावुक होते हुए कहा कि तीन मासूम बच्चों के साथ दिनभर इस उम्मीद में रहती थीं कि कोई आकर उनकी मदद कर दे, बच्चों को भरपेट खाना खिला दे। पढ़ाई छूटने की कगार पर थी। इस घोर संकट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2019 में श्री साकार विश्व हरि स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यहां से हौसला पाकर मूर्तियों का काम शुरू किया।