आईटीआई की जगह संचालित होते मिले स्कूल-अस्पताल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा में निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के फर्जी तरीके से संचालन की शिकायत पर वर्ष 2025 में तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने जिले में संचालित 127 निजी आईटीआई की जांच के आदेश दिए थे। 13 सदस्यीय कमेटी ने संस्थानों की जांच करके अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें उन्होंने आईटीआई की स्थिति संतोषजनक बताई थी। संवाद की टीम ने जब निजी आईटीआई की पड़ताल की तो तस्वीर उलट मिली। कहीं आईटीआई की जगह प्रतियोगी परीक्षा का कोचिंग चलता मिला तो कहीं खाली प्लॉट तो कहीं अस्पताल संचालित पाया गया। सवाल यही है कि जब मौके पर आईटीआई थी ही नहीं तो जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में उसे संतोषजनक कैसे बता दिया।
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तीन आईटीआई, तीन अलग तस्वीरें
सालासर आईटीआई: रिपोर्ट में भवन अलग, चल रहा बलूनी स्कूल ऑफ कॉम्पिटीशन
जांच अधिकारी रजनीश पांडे, अधीक्षक उद्यान विभाग ने सालासर आईटीआई की रिपोर्ट में भवन को अलग बताते हुए प्रशिक्षण की गुणवत्ता अच्छी और मशीनों का रखरखाव भी बेहतर बताया था। जब इसी पते दयालबाग के ख्वासपुर स्थित सालासर आईटीआई की पड़ताल की गई तो यहां बलूनी स्कूल ऑफ कॉम्पिटीशन संचालित मिला। चौकीदार ने बताया कि आईटीआई संचालक करीब तीन साल पहले ही यह जगह बेचकर जा चुके हैं। चौकीदार के मुताबिक कई बच्चे आईटीआई के पते पर पहुंचते हैं लेकिन जानकारी मिलने के बाद लौट जाते हैं।
विनायक आईटीआई: नामोनिशान नहीं मिला, खाली प्लॉट और पार्किंग
खेरिया मोड़ स्थित विनायक प्राइवेट आईटीआई की जांच जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने की थी। रिपोर्ट में संस्थान की प्रशिक्षण गुणवत्ता को अच्छा और मशीनों के आकार व व्यवस्था को संतोषजनक बताया गया था। जीपीएस रिकॉर्ड के आधार पर जब मौके पर पहुंचकर पड़ताल की गई तो वहां आईटीआई का भवन या प्रशिक्षण व्यवस्था नहीं, बल्कि खाली प्लॉट और गाड़ियों की पार्किंग मिली। मौके पर आईटीआई संचालन से संबंधित कोई व्यवस्था नजर नहीं आई। यानी जिस संस्थान को कागजों में लगभग पूरी तरह व्यवस्थित बताया गया, उसका मौके पर कोई अस्तित्व ही नजर नहीं आया।
बाबासाहेब आंबेडकर आईटीआई: रिपोर्ट में अच्छी गुणवत्ता, मौके पर अस्पताल
सिकंदरा स्थित बाबासाहेब आंबेडकर प्राइवेट आईटीआई की जांच भी रजनीश पांडे, अधीक्षक उद्यान विभाग ने की थी। रिपोर्ट में संस्थान की गुणवत्ता और मशीनों के रखरखाव को अच्छा बताया गया था। पड़ताल में एनएच-19 सिकंदरा में आईटीआई के बजाय अस्पताल संचालित मिला। आसपास के लोगों से आईटीआई के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने भी यहां किसी आईटीआई के संचालित होने की जानकारी होने से इन्कार कर दिया।
संभव है कि 20 साल पुरानी लीज खत्म होने के बाद आईटीआई बाद में शिफ्ट कर दी गई हों। इसलिए इस मामले में शिफ्टिंग का मुद्दा भी हो सकता है। हालांकि, इस वर्ष भी जांच चल रही है। इसके लिए 14 सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो निजी आईटीआई का सत्यापन कर रही है। पिछली बार जांच जिलाधिकारी के माध्यम से गठित टीम ने की थी। उस जांच में हम लोग शामिल नहीं थे और संबंधित अधिकारियों की टीम ने ही सत्यापन किया था।
-संजय सागर, संयुक्त शिक्षा निदेशक, आईटीआई