मैनपुरी। विकास खंड करहल की ग्राम पंचायत टिमरख में एक के बाद एक जांच जारी है। बावजूद इसके अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी है। विकास कार्यों के नाम पर लाखों के फर्जीवाड़े के बाद अब शौचालय के फर्जीवाड़े की जांच सुर्खियों में है। अब एक बार फिर मुख्य विकास अधिकारी ने शिकायकर्ता की अपील पर जिला विकास अधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं।
तीन साल से ग्राम पंचायत टिमरख में घोटालों की जांच कर रही है। उप जिलाधिकारी से लेकर जिला स्तरीय अधिकारी तक पांच बार ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़े की जांच कर चुके हैं। हर बार जांच में 13.95 लाख का गबन साबित हुआ था। मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान नजरश्री के अधिकार सीज कर दिए थे, लेकिन मामले में उच्च न्यायालय से स्टे दे दिया गया। इसके बाद टिमरख निवासी अखिलेश व धर्मेंद्र ने शौचालय निर्माण न कराए जाने की शिकायत की थी। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी और अवर अभियंता आरईडी बरनाहल को शामिल किया गया था। जांच हुई तो पता चला कि ग्राम पंचायत में 28 शौचालय में अनियमितता की गई है। जांच रिपोर्ट में कुल 3.36 लाख की धनराशि का दुरुपयोग करने के लिए प्रधान और सचिव को दोषी ठहराया गया। इस पर डीपीआरओ ने प्रधान और सचिव को नोटिस जारी किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मामले में शिकायकर्ता की अपील पर मुख्य विकास अधिकारी ने मामले की बारीकी से जांच करने के लिए जिला विकास अधिकारी पीके राय को नामित किया है। वे जल्द ही जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
तत्कालीन सचिव गए थे जेल
ग्राम पंचायत टिमरख में पहले भी लाखों का घोटाला सामने आ चुका है। जांच में 13.95 लाख का घोटाला निकलने के बाद सितंबर में कार्रवाई की गई थी। इसमें सीसी रोड व अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया था। मामले में सचिव प्रेमचंद्र बाथम को जेल जाना पड़ा था। वहीं प्रधान नजरश्री पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सकी थीं।
शौचालयों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया था। इसके बाद शिकायकर्ता ने अपील की कि प्रधान द्वारा लोगों से गलत शपथ पत्र लिए जा रहे हैं। इस पर जिला विकास अधिकारी को जांच के आदेश दिए गए हैं।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।