डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने एसआईटी की सूची 28 दिसंबर 2019 को वेबसाइट पर डालकर अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। हार्डकॉपी रजिस्टर्ड डाक से भेजने के लिए कहा गया। विश्वविद्यालय में ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार कर लिए गए। इसमें ऐसे भी आवेदन थे, जिनको अभ्यर्थियों ने कार्यालय में जाकर दिया।
अभ्यर्थियों को कैसे आवेदन करना था, इसकी जानकारी वेबसाइट के साथ समाचारपत्रों में जारी विज्ञापन में भी दे दी गई थी। सूत्रों के अनुसार अभ्यर्थियों को बचाने के उद्देश्य से तमाम अभ्यर्थियों के सीधे ऑफलाइन आवेदन ले लिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन को ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार करने पड़े।
ऑनलाइन 585 आवेदन प्राप्त हुए और ऑफलाइन की संख्या 233 है। परीक्षा समिति में प्रस्ताव रखा गया कि ऑफलाइन आवेदन यदि स्वीकार कर लिए गए हैं तो उन पर भी विचार कर लिया जाए। इस तरह 813 आवेदनों को अभी अमान्य नहीं माना है। इनकी ओर से दिए गए साक्ष्य को एसआईटी भेजा रहा है। इन पर अगले चरण में निर्णय लिया जाना है। 3637 अभ्यर्थी फर्जी श्रेणी में शामिल थे, इसमें से 2824 को ही अभी फर्जी माना गया है।
महज आवेदन से नहीं बचेंगे फर्जी अभ्यर्थी
‘स्टाफ को ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं करना था, अब जब आवेदन ले लिए गए हैं तो उन्हें शामिल कर लिया गया है। महज आवेदन मात्र से कोई भी फर्जी अभ्यर्थी बच नहीं पाएगा। इन पर भी जल्द निर्णय ले लिया जाएगा। प्रक्रिया चल रही है। - गिरजाशंकर शर्मा, पीआरओ, विवि
- 585 आवेदन ऑनलाइन 12 जनवरी तक प्राप्त हुए।
- 233 ऑवेदन ऑफलाइन रजिस्टर्ड डाक, स्पीडपोस्ट व सीधे दिए गए।
- 813 आवेदन कुल मिले। इन्हें अभी फर्जी नहीं मनाया गया है।
फर्जी शिक्षकों को बचाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग में अग्निकांड
बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आठ अक्तूबर 2019 को अग्निकांड भी फर्जी प्रमाणपत्र लगाने वाले शिक्षकों को बचाने के लिए ही किया गया था। उसी कक्ष में आग लगाई गई थी, जिसमें एसआईटी की सूची में चिह्नित शिक्षकों के रिकॉर्ड रखे हुए थे। अग्निकांड के दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पाई। फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया लटक गई।