इंजीनियरों की टीम पहुंची।
- फोटो : अमर उजाला
गर्डरों के जमीन पर गिरने से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए टीम ने जवाहर पुल और निर्माणाधीन पुल के बीच बालू की दीवार खड़ी करने का काम किया। इसके साथ ही बीच में लटके गर्डरों को किसी तरह के कंपन से बचाने के लिए वेल्डिंग आदि का कार्य किया जाता रहा।
इन गर्डरों को जवाहर पुल को बगैर नुकसान पहुंचाए ही यहां से तोड़कर हटाना है। इसके लिए लखनऊ से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम देर शाम आगरा पहुंची है। अब यह टीम वजनी गर्डरों को हटाने के लिए कार्य योजना बनाएगी।
जीनियरों का कहना है कि इन गर्डरों को अब दोबारा प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए इन्हें तोड़कर हटाया जाएगा। इसके लिए नुकसान से बचाने को ही बालू की दीवार बनाई गई है।
पुल बंद होने से लंबा जाम लग रहा है।
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1. रूट डायवर्जन : इससे रास्ता लंबा हो गया है। वाहनों को चौड़ी सड़कों के बजाय संकरे रास्तों से निकाला जा रहा है।
2. ट्रैफिक जाम : सीधा रास्ता बंद हो जाने से ट्रैफिक जाम है। आधा घंटे का सफर तीन घंटे में पूरा हो रहा है। हाल बेहाल है।
3. सीएनजी ठप : पुल के नीचे पाइप लाइन बंद हो गई है। सीएनजी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। लोग परेशान हैं।
4. महंगा हुआ सफर : रूट डायवर्जन का ऑटो वाले फायदा उठा रहे हैं। 10 रुपये की जगह 150 रुपये किराया वसूला जा रहा है।