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Agra News: बिना चिकित्सक के चल रहे चार आयुर्वेद अस्पताल

Fri, 01 Mar 2024 12:00 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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कासगंज। विश्व में पहचान बना चुकी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति दम तोड रही है। जिले में आयुर्वेद चिकित्सा का हाल बेहाल है। चार आयुर्वेद अस्पताल तो ऐसे हैं जिन पर चिकित्सक नहीं हैं। वार्डबॉय के सहारे मरीजों का इलाज हो रहा है तो कहीं स्वीपर ही मरीजों का उपचार करते दिख जाते हैं। जिले में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इलाज करने के लिए 11 अस्पताल खुले हुए है। इनमें से दो अस्पताल कस्बा क्षेत्र में संचालित हो रहे हैं। नौ अस्पताल ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। जिला स्तर पर कोई अस्पताल नहीं होने से एटा जनपद से ही संबंधित चिकित्सकीय कार्य संचालित होते हैं। दवाएं भी सीधे नहीं आती। चिकित्सीय स्टाफ की स्थिति काफी खराब है। मामों, मोहनपुर, ललुपुरा, एवं सिकंदरपुर वैश्य अस्पताल तो ऐसे हैं जहां चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। इनमेंं ले ललुपुरा का अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। मोहनपुर में वार्ड बॉय मरीजों को देखता है। सबसे खराब हाल मामों व सिकंदरपुर वैश्य के हैं। इन अस्पतालों पर आने वाले मरीजों को स्वीपर ही दवा देता है। जो शेष नौ अस्पताल हैं उनमें से बजीरपुर एवं मझोला में ही चिकित्सक फार्मासिस्ट व वार्डबॉय हैं, लेकिन इनमें स्वीपर नहीं हैं। सरावल का अस्पताल मात्र चिकित्सक के सहारे चल रहा है। तवालपुर में चिकित्सक व फार्मासिस्ट मौजूद हैं। वहीं किनावा, सिढ़पुरा, गोरहा के अस्पताल चिकित्सक व वार्डबॉय के सहारे चल रहे हैं। इन अस्पतालों में से मात्र तवालपुर एवं मझोला का अस्पताल ही ऐसा है जिन पर अपना भवन है। अन्य अस्पताल क्षेत्र के लोगों के रहमो-करम पर है। क्षेत्र के लोगों ने अस्पताल चलाने के लिए एक कक्ष उपलब्ध कराया है जिसमें अस्पताल संचालित होता है।
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