गाजियाबाद। आगरा में दस वर्ष पुराने रिश्वत मामले में रेलवे के पूर्व चीफ यार्ड मास्टर रफी अहमद को विशेष सीबीआई अदालत ने चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के न्यायाधीश अंजनी कुमार ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उस पर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामला वर्ष 2015 का है। विकास यादव नामक व्यक्ति की शिकायत पर सीबीआई ने कार्रवाई की थी। शिकायत में आरोप लगाया था कि रफी अहमद ने काम के बदले पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। जांच एजेंसी ने सत्यापन के बाद चार जुलाई 2015 को आरोपी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की मदद से रिकॉर्ड किया गया था। इस रिकॉर्डिंग को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया और गवाहों ने भी इसकी पुष्टि की। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने अदालत में यह दलील दी कि आरोपी को बातचीत की मूल रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं कराई गई, इसके बचाव का अधिकार प्रभावित हुआ। बचाव पक्ष का कहना था कि केवल लिखित प्रतिलिपि पर्याप्त नहीं है और रिकॉर्डिंग की प्रति मिलनी चाहिए, ताकि गवाहों से प्रभावी जिरह की जा सके। अदालत ने इस पहलू पर भी विचार किया और माना कि आरोपी को सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिश्वतखोरी जैसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद सोमवार को भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालत ने फैसला सुनाया।