फिरोजाबाद। कोरोना से जंग के लिए वैक्सीन है जरूरी... यह संदेश सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। कोरोना से जंग में वैक्सीन की भूमिका अहम मानी जा रही है। कोरोना वैक्सीन की दो डोज लगवाना ही कारगर हैं लेकिन स्वास्थ्य कर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर्स ने ही वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लगवाई। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि एक डोज लगवाने का कोई फायदा नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने वालों का प्रतिशत जिले में काफी कम हैं। लाभार्थियों को मेसेज अथवा फोन कर वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के लिए बुलाया जा रहा है। इसके बावजूद जिले में दूसरी डोज लगवाने के लिए लोग बूथ पर नहीं पहुंच रहे हैं।
जिले में करीब 30 प्रतिशत स्वास्थ्यर्मियों को दूसरी डोज लगवाने का समय गुजर चुका है। यही हाल फ्रंटलाइन वर्कर्स का है। करीब 50 फीसदी फ्रंटलाइन वर्कर्स ने वैक्सीन दूसरी डोज नहीं लगवाई है। 45 वर्ष से अधिक उम्र के भी 15 प्रतिशत लोग भी पहली डोज लगवाने के बाद दूसरी डोज लगवाना भूल गए।
वैक्सीन की दोनो डोज बनीं संजीवनी
जनपद में 46 से अधिक लोग वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के बाद कई संक्रमितों के संपर्क में आए। इस पर वे भी संक्रमित हो गए लेकिन किसी को भी अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। स्वयं को होम आइसोलेट कर खुद को साधारण दवाओं से ही कोरोना को हरा दिया।
वैक्सीन आने के बाद बुखार आना सामान्य
वैक्सीन लगवाने के बाद कइयों को बुखार की समस्या रही। कई लोगों को दर्द भी हुआ। हालांकि दो दिन में सभी ठीक हो गए। चिकित्सकों की मानें तो वैक्सीन लगने के बाद बुखार आना सामान्य बात है। कई लोगों को बुखार भी नहीं आता है।
कोरोना की दूसरी डोज लगवाने के बाद ही प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। निर्धारित मात्रा में ही दवा को लेना चाहिए अन्यथा फायदा नहीं होता है। पहली डोज लगवा चुके लोग समय से दूसरी डोज लगवा लें और कोरोना से अपनी सुरक्षा करें। भ्रांति होने पर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. एके श्रीवास्तव, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
जिले में टीकाकरण की स्थिति
लाभार्थी पहली डोज दूसरी डोज नहीं ली दूसरी डोज
हेल्थ वर्कर 9200 6500 2700
फ्रंटलाइन वर्कर 11800 5900 5900
45 प्लस 105300 1500 89500