शाहगंज, कोल्हिाई निवासी मो. शाकिर ने मंगलवार को इस नई सर्किल रेट पर इस संबंध में आपत्ति दर्ज कराई है। प्रमुख सचिव स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन को भेजी शिकायत में खसरा नंबरों की आड़ में उप निबंधक व सहायक महानिरीक्षक पर निजी स्वार्थ पूर्ति के लिए आरोप लगाए हैं।
राजस्व क्षति के लिए सहायक महानिरीक्षक निबंधन के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। उप निबंधक प्रथम, द्वितीय और तृतीय पर अपने चेहते बिल्डर एवं भूमाफिया से मिलकर सर्किल रेट लिस्ट में मनमानी के आरोप लगाए हैं। पुरानी रेट लिस्ट 1 अगस्त 2017 को लागू की गई थी।
14 दिसंबर व 21 दिसंबर 2018 में तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व राकेश कुमार मालपाणी ने सहायक निरीक्षक को एक सप्ताह में सड़क के सहारे व लिंक मार्गों पर खसरा नंबर शामिल करने और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। बार-बार पत्र के बावजूद आठ साल तक जिले में सड़क किनारे हुए बैनामे बिना खसरा नंबर की सूची से होते रहे।
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20 से अधिक आपत्तियां आईं
नए सर्किल रेट पर मंगलवार तक 20 आपत्तियां आ चुकी हैं। मुड़ेहरा निवासी किसान सोबर सिंह व राधा किशन ने आपत्ति दर्ज कराई है कि उन्हें वर्ष 2010 की रेट से भूमि का मुआवजा मिला है। जब तक वह दूसरी जगह जमीन नहीं खरीद लें। सर्किल रेट नहीं बढ़ाए जाएं। खेड़ा भगौर के किसानों ने आपत्ति दर्ज कराई है कि खेड़ा भगौर, गामरी, जारऊ कटरा गांव अगल-बगल हैं। लेकिन, इनकी सर्किल रेट में अंतर है। सर्किल रेट समान रखे जाएं। फारचून प्रोपटेक प्रा.लि. की आपत्ति है कि केपीएस टाउन, बरौली अहीर में सर्किल रेट न बढ़ाए जाएं।
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