ऊंट पर सवार विदेशी श्रद्धालु
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सायंकाल वैदिक रीति से श्रीविग्रह को तीन रथों पर विराजमान कराया गया। पूजन अर्चन के बाद भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ नगर भ्रमण के लिए निकले। ठाकुरजी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बैंडबाजों व ढोल मृदंग की धुन पर भक्तजन झूमते चल रहे थे। नगर के अनेक मार्गों पर ठाकुरजी पर पुष्प वर्षा की गई।
इस दौरान वृंदावनवासियों के साथ विदेशी भक्त भी ठाकुरजी के दर्शन कर झूम उठे। विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए रथयात्रा मंदिर परिसर पहुंची। प्राचीन चार संप्रदाय आश्रम, श्री राधामदनमोहन जी सहित कई प्रमुख मंदिरों के ठाकुरजी रथ पर सवार होकर यात्रा में शामिल होते हुए प्राचीन ज्ञानगुदड़ी की परिक्रमा कर पुन: मंदिर पहुंचे। यहां आतिशबाजी की गई।