महताब बाग में रिकॉर्ड की गईं कहानियां
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दादी-नानी द्वारा सुनाई जाने वाली लोक कथाएं अब एनिमेटेड फिल्मों में भी देखने को मिलेंगी। इन फिल्मों में ताजनगरी के साहित्यकार भी बच्चों को अपनी कहानियां सुनाते दिखाई देंगे। गुरुवार को ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया की पहल पर प्रोडक्शन हाउस आइडिया वर्क्स की टीम यहां के साहित्यकारों की कहानियों को रिकॉर्ड करने के लिए पहुंची।
मेहताब बाग में पूरे दिन चली रिकॉर्डिंग में साहित्यकार डॉ. अरुण उपाध्याय, ऐलेश अवस्थी, डॉ. राजेंद्र मिलन, डॉ. पुनीता पचौरी, सुशील सरित, अर्चना, अलका अग्रवाल की स्वरचित और पारंपरिक लोक कथाओं की टीम ने रिकॉर्डिंग की। ‘दुर्गादास ज्योतिष शास्त्री’, ‘सुगंध रानी’, ‘श्रीकृष्ण और यक्ष’ ‘मगरमच्छ’, ‘खाचड़ी’, ‘भीमा बाई’ समेत कुल बीस कहानियों की रिकॉर्ड किया गया।
पूरे देश से साहित्यकारों द्वारा लिखी गईं 100 कहानियों को रिकॉर्ड किया जाएगा। दिल्ली से रिकॉर्डिंग के लिए आईं अरूपा लहरी और प्रिया का कहना था कि दादी-नानी की कहानियों का जो दौर समाप्त होता जा रहा है, उस दौर को फिर से जिंदा करने की दिशा में यह एक कदम है। इसके साथ ही कहानियों के माध्यम से बच्चों को शिक्षित करना भी एनिमेटेड फिल्म बनाने का मकसद है। उन्होंने बताया कि कहानियों को संपादित करके एनिमेटेड फिल्मों का निर्माण भी किया जाएगा।