वृंदावन में समाज गायन की परंपरा आज भी टटिया स्थान, श्रीराधावल्लभ मंदिर, रसिक बिहारी मंदिर और भट्टजी की हवेली सहित कुछ और प्रमुख मंदिरों तक सीमित होकर रह गई है।
स्वामी श्रीहरिदास का गायन सुनने आया था अकबर
कहते हैं कि 16वीं शताब्दी में सम्राट अकबर संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी श्रीहरिदास जी के गायन की ख्याति सुनकर निधिवन पहुंचा था। राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली और वृंदावन शोध संस्थान में संरक्षित इसके प्राचीन चित्र इसका प्रमाण है।
वृंदावन शोध संस्थान के अध्यक्ष आरडी पालीवाल ने बताया कि ब्रज संस्कृति का अहम हिस्सा समाज गायन की परंपरा अब लगभग चंद मंदिरों में नजर आती है। इसे रोजगार से जोड़ते हुए मंदिरों में फिर से पुनर्जीवित करने के प्रयास के तहत केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में मंदिर दर्शन के दौरान समाज गायन यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक नया माहौल प्रदान करेगा। नई पीढ़ी को इसमें प्रशिक्षित करते हुए जोड़ा जाएगा। इस परंपरा के महत्व को बताने वाली पांडुलिपियां संस्थान में मौजूद हैं।
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