नाम तो हाईवे है, लेकिन खंदारी से वाटर वर्क्स चौराहा तक वाहन रफ्तार से नहीं, बल्कि रेंगकर पहुंचते हैं। वजह है एनएच-2 पर खंदारी, सुल्तानगंज पुलिया और वाटरवर्क्स चौराहे पर बन रहे फ्लाई ओवर। इनके निर्माण कार्य की कछुआ चाल की वजह से शहर के लाखों लोग इस भीषण गर्मी में हर दिन जाम में फंसते हैं। लोगों का समय औैर ईंधन तो बर्बाद होता ही है, ताजनगरी में प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
दिल्ली-आगरा सिक्स लेन प्रोजेक्ट के तहत तीनों फ्लाई ओवर का काम दो साल पहले शुरू किया गया। नेशनल हाईवे अथारिटी अधिकारियों ने बिजली के खंभे, सीवर लाइन, जल निगम लाइनें, गैस पाइप लाइन और मंदिर, मजारों को शिफ्ट करने की मांग की थी। एनएचएआई अधिकारियों के मुताबिक, वाटर वर्क्स चौराहे पर नई सीवर और पेयजल पाइप लाइन पड़ने से काम लेट हुआ तो वहीं एएसआई की एनओसी के इंतजार में काम बंद रहा।
सुल्तानगंज की पुलिया पर मंदिर को प्रशासन अब तक नहीं हटवा सका है। बिजली के खंभों को लोगों ने नहीं लगने दिया तो अंडरग्रांउड ही लाइन डाली गई। यही हाल खंदारी चौराहे का भी है। मंदिर और मजार हटाने में प्रशासन ने महीनों का वक्त ले लिया।
दिल्ली की तेज, आगरा में सुस्त ने
कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दिल्ली में जिस रफ्तार से फ्लाईओवर बनाए गए, उसने हर किसी को चौंकाया, लेकिन आगरा में तीनों फ्लाई ओवर की रफ्तार बेहद धीमी है। दिल्ली की तर्ज पर आगरा में न तो स्पान बाहर तैयार कराए गए और न ही पिलर का काम ही तेजी से किया गया। वाटर वर्क्स, सुल्तानगंज की पुलिया और खंदारी चौराहे पर निर्माण कार्य में मजदूर और मशीनें नजर ही नहीं आ रहे।
वाटर वर्क्स चौराहे पर अग्रवन और अतिथिवन के साथ क्षत्रिय भवन भी है। जब से वाटरवर्क्स चौराहे पर पुल का काम शुरू हुआ है, तभी से जाम के चलते इन तीनों ही भवनों पर कार्यक्रम बेहद कम हो गए। शहर का बड़ा वर्ग अग्रवन में ही समारोह आयोजित करता था, लेकिन वाटर वर्क्स पर बन रहे पुल के कारण जाम से परेशान होकर लोग दूसरी जगहों को चुन रहे हैं। कमला नगर के लोगों के लिए अग्रवन सबसे मुफीद है, लेकिन वह जाम के झाम की जगह सुकून चुनते हुए दूसरे स्थानों पर समारोह कर रहे हैं।
‘बाईपास के तीनों चौराहों पर फ्लाई ओवर का काम बेहद सुस्त गति से चल रहा है। हमने कई बार केंद्रीय मंत्री को इससे अवगत कराया। बैठकोें में तो अफसर काम में तेजी का वादा कर देते हैं, पर सड़क पर चाल धीमी है। लोग अब परेशान हो चुके हैं।’
केसी जैन
निवासी, पालीवाल पार्क
‘बिजली, जल निगम, मंदिर-मजार के काम प्रशासन को कराने हैं। इनकी वजह से फ्लाईओवर निर्माण की रफ्तार धीमी है। बाधाएं हट जाएं तो हम जनवरी 2017 तक तीनों फ्लाई ओवर बना देंगे। दिल्ली की तरह ही स्पान बाहर बनाकर रखने की तैयारी है।’
मो. शफी
प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई