कासगंज में लहरा गंगा की तलहटी से धूल के गुबार के बीच से गुजरते कांवड़िए
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कांवड़ मेेला में भीड़ बढ़ते ही अव्यवस्थाओं का आलम नजर आने लगा। गंगा की रेतीली तलहटी में समुचित इंतजाम न होने के कारण कांवड़ियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी धूल के कारण श्रद्धालुओं को उठानी पड़ी। वहीं तमाम वाहन रेत में फंसते नजर आए। श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
तीर्थनगरी सोरों का यह कांवड़ मेला काफी प्राचीन है। इसके बावजूद यहां व्यवस्थाओं का टोटा अक्सर नजर आता है। गंगा की तलहटी की सबसे बड़ी समस्या धूल है। रेतीली जमीन होने के कारण यहां धूल तेजी से उड़ती है इससे श्रद्धालुओं को दिक्कतें होने लगती हैं। धूल से बचने के लिए तमाम श्रद्धालु झाड़ियों के ऊबड़ खाबड़ रास्ते से होकर निकलते हैं। वहीं तलहटी में तमाम बाइके और चार पहिया वाहन भी फंस जाते हैं। नगर पालिका प्रशासन के द्वारा न धूल रोकने के इंतजाम किए जाते हैं और न ही तलहटी में फंसने वाले वाहनों की समस्या का समाधान होता है। जबकि पानी के छिड़काव का सहारा लेकर काफी हद तक धूल को रोका जा सकता है, जबकि ऐसे कदम भी नहीं उठाए जाते। श्रद्धालु जसवंत ने बताया कि यहां सब भगवान के भरोसे व्यवस्थाएं रहती हैं। वह कई वर्षों से कांवड़ भरने आ रहे है, लेकिन व्यवस्थाओं में परिवर्तन नहीं नजर आएगा। वहीं श्रद्धालु महेश ने बताया कि बालू में वाहन फंसने से काफी परेशानी होती है। श्रद्धालुओं को धक्का लगाकर वाहन निकालने पड़ते हैं।
कासगंज के लहरा से गंगाघाट का रेतीला रास्ता- फोटो : KASGANJ