भगवान श्रीकृष्ण को लू के थपेड़ों से बचाकर शीतलता प्रदान कराने को रोजाना फूल बंगले सजाए गए। इसमें 3000 क्विंटल से भी ज्यादा फूल लग गया। सुगंधित फूलों से मंदिर महकते रहे। वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में फूलडोल एकादशी से लेकर हरियाली अमावस्या तक रोज फूल बंगले सजते हैं।
अप्रैल से लेकर जुलाई तक अकेले वृंदावन में ही हर रोज 15 क्विंटल फूलों की खपत हुई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारिकाधीश समेत ठाकुरजी के दूसरे मंदिरों में भी फूलों की बड़ी मांग रही। वृंदावन के श्री बांकेबिहारी मंदिर में फूलडोल अकादशी (अप्रैल) से फूल बंगले सजने का क्रम शुरू हो जाता है। भीषण गर्मी के मौसम में भगवान को ठंडक महसूस हो इसके लिए भगवान सुगंधित फूलों के बंगले में विराजमान होते हैं।
अकेले बांकेबिहारी मंदिर में ही 10 क्विंटल फूल का इस्तेमाल हर रोज हो जाता है। वहीं प्रेम मंदिर, इस्कान मंदिर, राधाबल्लभ, राधा श्याम सुंदर मंदिर, राधारमण मंदिर, रंगजी मंदिर और राधादामोदर मंदिर में भी करीब 5 क्विंटल फूल प्रयोग हो जाता है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर ही 15 क्विंटल फूल प्रति माह प्रयोग होता है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी का कहना है कि गर्मियों में करीब 60 क्विंटल फूल इस्तेमाल हो जाता है। वहीं मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर में अप्रैल, मई और जून में फूल बंगले सजाए जाते हैं। चमेली, रायबेल और कुंद जैसे सुगंधित फूलों का ही प्रयोग किया जाता है। मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी का कहना है कि तीन महीने फूलों की मांग ज्यादा रहती है।
इन तीन महीनों में 20 से 25 क्विंटल फूल प्रयोग हो जाता है। वहीं बलदेव के दाऊजी मंदिर में 40 क्विंटल प्रति माह फूल से बंगले सजाए जाते हैं। यानी अप्रैल से जुलाई तक यहां 60 क्विंटल फूल प्रयोग हो जाता है। मंदिर के रिसीवर रामकटोर पांडेय का कहना है कि कभी कभी एक महीने में 50 क्विंटल तक फूल प्रयोग हो जाता है।