कासगंज। कछला गंगानदी में घटता बढ़ता जलस्तर ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ा रहा है। पिछले 24 घंटे में गंगानदी में 10 सेंटीमीटर पानी कम हो गया है। इससे यह 163.60 रह गया है। लेकिन हरिद्वार बैराज से बृहस्पतिवार को छोड़ा गया 1 लाख 38 हजार 712 क्यूसेक पानी फिर से गंगा में उफान के संकेत दे रहा है। साथ ही तराई क्षेत्र के खेतों में भरे पानी से सैकड़ों बीघा फसल बरबादी के कगार पर है।
बैराजों से निरंतर पानी का दबाव कम ज्यादा हो रहा है। इससे कभी पानी घट जाता है तो कभी बढ़ रहा है। हालांकि जिस हिसाब से फिर से बैराजों से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा है। उससे आशंका बढ़ रही है कि जलस्तर फिर से बढ़ जाएगा। इधर तराई के जिन गांवों में खेतों में गंगानदी का पानी घुस गया है वहां बर्बादी हो रही है।
खेतों में खड़ी शकरकंद, मक्का, बाजरा, धान की फसल बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। फसलें धीमे धीमे सड़ने लगी है। इससे किसान चिंतित हैं। गंगापार के गांव पनसोती, जिनौल, नगला मुंता, हिम्मतपुर बझेरा, नौली फतुहाबाद में पानी आबादी में जमा हुआ है। इसके अलावा यहां के आस पास खेतों में भी जलभराव होने से बैगन, शकरकंद की फसल एक बड़े क्षेत्रफल में सड़ गई है।
किसानों की बर्बादी पर बढ़ी संवेदना, होगा आकलन
किसानों की फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंचती देख प्रशासन की संवेदनाएं बढ़ गई हैं। एडीएम अजय कुमार श्रीवास्तव ने तराई के क्षेत्रों में तैनात लेखपाल और राजस्व निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में निरंतर निगरानी बनाए रखें और जैसे ही खेतों से पानी निकल जाए तो फसलों के नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
जलस्तर का लेखा जोखा
- 138712 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 136472 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 125733 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
वर्जन-
- कछला गंगानदी में बैराजों से पानी छोड़ा जा रहा है। नदी में लो फ्लड है। वैसे तो पानी कम हो रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में जलस्तर कुछ बढ़ने की संभावना है। - अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।