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चंबल में बाढ़, 10 गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कटा

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बाह। राजस्थान में लगातार हो रही बारिश से ओवरफ्लो हुए कोटा बैराज से मंगलवार की रात चंबल नदी में छोडे़ गए 5 लाख क्यूसेक पानी ने बाह के 38 गांवों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। 10 गांवों मऊ की मढै़या, गोहरा, रानी पुरा, भटपुरा, गुढ़ा, झरना पुरा, डगोरा, रेहा, बीच का पुरा, पुरा डाल का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।
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नदी का पानी चेतावनी स्तर 127 मीटर को पार कर खतरे के निशान 130 मीटर के करीब पहुंचने लगा है। कछार के बाद 38 गांवों के मैदानी इलाके के खेत खलिहान भी डूब गए हैं। प्रशासनिक अमला बचाव और राहत की तैयारियों में जुट गया है।
कोटा बैराज से छोड़े गए पानी के कारण बाह में बृहस्पतिवार को चंबल नदी का जलस्तर 128 मीटर तक पहुंच गया। नदी खतरे के निशान 130 मीटर से सिर्फ दो मीटर नीचे बह रही है। इससे जहां 10 गांव उफान के पानी से घिर गए हैं। इन गांवों के रास्तों में पानी भर गया है। वहीं पुरा शिवलाल, पुरा भगवान, धांधू पुरा, उमरैठा पुरा, कएड़ी, जगतूपुरा, कुंवर खेड़ा, बासौनी, जेबरा, कमोनी, उदयपुर खुर्द, कछियारा, खेड़ा राठौर, महुआशाला, नदगवां, बाघराज पुरा, कोरथ आदि 17 गांवों के करीब पानी पहुुंच गया है। ग्रामीण ऊंचाई वाले इलाकों की ओर जाने लगे हैं। 38 गांवों में बाढ़ के खतरे से रतजगा के हालात बने हुए हैं। प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद बाह के एसडीएम रतन वर्मा ने बताया कि प्रभावित गांवों में लेखपालों को रुकने के निर्देश दिए हैं।
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चंबल के उफान प्रभावित गांवों में महिलाओं और रिश्तेदारों की जन्माष्टमी मनाने की हसरत पूरी नहीं हो सकी। बृहस्पतिवार को गोहरा गांव की सड़क पर पानी भरा देख फूलन देवी, जलेबीश्री, सुशील कुमार वापस लौट गए। उन्होंने बताया कि गांव के जन्माष्टमी उत्सव में शामिल होने के लिए आए थे। मऊ की मढै़या, रानीपुरा, भटपुरा, झरनापुरा में भी जन्माष्टमी मनाए जाने की टूटी ख्वाहिश के साथ गांव की बहू-बेटियां बैरंग वापस लौट गईं। प्रभावित गांवों के स्कूलों में पढा़ने के लिए बाहर से जाने वाले शिक्षक शिक्षिकाएं भी नहीं पहुंच सके। चंबल नदी में आई बाढ़ के पानी में बिजली के पोल भी डूब गए हैं। एसडीओ जैतपुर मनमोहन शर्मा ने बताया कि एहतिहातन देवपुरा फीडर के गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा तथा अभयपुरा फीडर के गुढ़ा गांव की बिजली काट दी गई है। इससे दीये की रोशनी के भरोसे गांव के लोग रात काटने को मजबूर हो गए हैं। चंबल के उफान के पानी के साथ घड़ियाल और मगरमच्छ भी बह गए। धौलपुर, बाह तक के घड़ियाल बहकर इटावा के पंचनदा तक पहुंच जाते हैं। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड ने बताया कि बाढ़ के बाद घड़ियाल और मगरमच्छ वापस लौट आते हैं। घड़ियाल शिशुओं के वापस लौटने की संभावनाएं कम रहती हैं। नदी के उफान के साथ ही घड़ियाल और उनके बच्चे किनारा पकड़ते हैं। इसलिए उनके खादर में आने की संभावनाएं रहती हैं। उन्होंने बताया कि खादरों में आने वाले घडियालों और शिशुओं की निगरानी की जा रही है। नदी किनारे ग्रामीणों को भी बीहड़ या गांव के आसपास घड़ियाल या मगरमच्छ दिखने पर वन विभाग को सूचना देने के लिए कहा गया है।
चंबल किनारे के ग्रामीण खेती से ज्यादा पशुपालन पर आश्रित हैं। प्रभावित गांव के लोग खादर जलमग्न होने से बीहड़ में पशु चराने नहीं ले जा पा रहे। गोहरा, रानीपुरा, भटपुरा आदि गांवों के लोग निचले इलाके में रखे सामान के साथ ही भूसे को भी
टीले आदि पर ले जाने में जुटे दिखे। झरनापुरा में डेयरी पर इकट्ठे होने वाले दूध को कस्बों तक ले जाने के लिए जान जोखिम में डालनी पडी। गर्दन तक भरे पानी वाले रास्ते से मुश्किल से दूध को ले जाने की तस्वीरे सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। झरनापुरा के नेत्रपाल वर्मा ने बताया कि खेत और रास्तों में पानी भरा है। लोग जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। आसपास के दूसरे गांवों में भी कमोवेश ऐसे ही हालात बन गए हैं।
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