एक्सप्रेसवे के टोल पर चेकिंग के दौरान पकड़ी गईं महिलाएं
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आगरा की फतेहाबाद थाना पुलिस ने कोख किराए पर देकर बच्चे बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। जुड़वा सहित तीन शिशुओं को कार से नेपाल बॉर्डर पर देने जा रहीं दो महिलाओं, एक एजेंट और दो कार चालकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक महिला के जुड़वा बच्चे हैं। तीसरे बच्चे की मां साथ नहीं आई थी। उसकी तलाश है। गिरफ्तार दूसरी महिला भी कोख का सौदा करती है।
एसपी पूर्वी प्रमोद कुमार ने बताया कि शुक्रवार दोपहर को सूचना मिली थी कि बच्चा बेचने वाला गिरोह फतेहाबाद से निकलेगा। एक्सप्रेसवे के टोल पर दो गाड़ियों को रोक लिया गया। दो महिलाओं के पास एक-एक महीने के तीन शिशु थे।
दोनों कारों के चालक और एक एजेंट भी पकड़ा गया। शिशुओं को फरीदाबाद से गोरखपुर के नेपाल बॉर्डर ले जाया जा रहा था। महिलाओं को पूछताछ के लिए महिला थाने लाया गया।
साढ़े तीन लाख पर किराये पर दी थी कोख
एक महिला से पूछताछ के आधार पर एसपी ने बताया कि तीन में से एक शिशु फरीदाबाद में रह रही बिहार की महिला का है। उसने साढ़े तीन लाख रुपये में किराए पर कोख दी थी। उसने रुपये लेने के बाद बच्चा दे दिया था। जुड़वा शिशु गिरफ्तार महिला के हैं। वो भी बिहार की है और फरीदाबाद में रहती है।
नेपाल के दंपती ने बच्चों को जन्म देने के लिए गिरोह के एजेंट से संपर्क किया था। इसके एवज में पांच लाख रुपये रकम देने की बात तय हुई थी। कुछ रकम मिल चुकी थी। जन्म के बाद बच्चों को उनके खरीदार माता-पिता के सुपुर्द करना था। एजेंट ने इसी तरह तीन दंपती से संपर्क कर रखा था।
बगैर चिकित्सक की अनुमति के कोख दूसरे को देना अपराध : एसपी
एसपी आरए ने बताया कि किराए की कोख के लिए कानून है। चिकित्सक की अनुमति से ही ऐसा कर सकते हैं। उसके भी नियम है। बिना एग्रीमेंट के कोई भी ऐसा नहीं कर सकता। विदेशी दंपती के लिए किराए की कोख देना गैर कानूनी है। मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। अभी महिलाओं से पूछताछ की जा रही है।
पकड़े जाने के डर से सामाजिक दूरी बनाकर चल रहे थे
सामाजिक दूरी के नियम के अनुसार एक गाड़ी में चालक सहित दो लोग बैठ सकते हैं। इसलिए गिरोह को गोरखपुर जाने के लिए दो गाड़ियां करनी पड़ीं। सभी गोरखपुर होते हुए नेपाल जा रहे थे।
बच्चे जिनके सुपुर्द करने थे, उनकी जानकारी पकड़े गए गिरोह के अन्य सदस्य के पास है। उसे सिर्फ बच्चों को साथ ले जाने के लिए रुपये मिलने थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य ही बताते।