सोरोंजी। हरि की पौड़ी में हजारों की संख्या में मछलियों की मौत से धर्मप्रेमियों में रोष है। एक माह से हरि की पौड़ी के जल में मछलियों की मौत हुई थी। लोगों द्वारा हरि की पौड़ी के जल की जांच कराने की मांग की है।
मंगलवार की सुबह जब श्रद्धालु परिक्रमा करने और मंदिरों पर दर्शन करने के लिए निकले तो हरि की पौड़ी में मछलियों को मृत देखा, जिसकी जानकारी होने पर पालिका के सफाई कर्मियों द्वारा बाहर निकाल दिया गया। दो घंटे बाद फिर से मछलियां जल की ऊपरी सतह पर आकर तड़प कर दम तोड़ने लगी। लोगों का आशंका है कि प्रदूषण के कारण ऑक्सीजन का स्तर कम होने से मछलियां दम तोड़ रही हैं। पिछले माह भी मछलियां मरी थी, जिसके बाद लगातार तीन दिन तक हरि की पौड़ी में जल की आपूर्ति किए जाने के बाद मछलियों के मरने की घटना नहीं हुई। तीर्थनगरी के लोगों के द्वारा जल की जांच कराए जाने की मांग की है।
असामाजिक की तत्वों की करतूत तो नहीं
कुछ लोगों के द्वारा आशंका जताई जा रही है कि कुछ असामाजिक तत्व रात्रि में अंधेरे का फायदा उठाते हुए जल में कुछ ऐसा पदार्थ डाल देते हैं, जिससे मछलियों की मौत हो जाती है और बड़ी मछलियों को उठा ले जाते हैं। क्योंकि मछलियों की मरने की घटना अधिकतर रात में होती है और सुबह होने पर लोगों को इसकी जानकारी होती है।
तीर्थनगरी के लोगों की बात:
हरि की पौड़ी में आएदिन जलीय जीव जंतुओं का मरना दुखद है। प्रशासन को जल की जांच करानी चाहिए। जिससे इन जीव जंतुओं की मृत्यु का सच सामने आ सके।
-कैलाश चंद्र कटारे, अध्यक्ष गंगा सभा
दूरदराज के प्रांतों से श्रद्धालु अस्थि विसर्जन व गंगा स्नान करने आते हैं। जल में उतराती मृत मछलियों व प्रदूषण को देखकर उनकी भावनाएं आहत होती हैं। - रामदर्शन महेरे।
हरि की पौड़ी को बहती जल धारा में परिवर्तित करने से ही सारी समस्या हल होंगी। बहती जल धारा के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे।- अभय शंकर स्थापक।
हरि की पौड़ी में जल आपूर्ति के लिए निरंतर प्रयत्नशील हैं। नहर न आने पर वाटर पंप, गोमुख आदि के माध्यम से जल आपूर्ति कराई जाती है। हरि की पौड़ी में प्रदूषण व गंदगी साफ करने के लिए दिन में दो बार नावों के माध्यम से सफाई कराई जा रही है। - मुन्नीदेवी, नगर पालिका अध्यक्ष सोरोंजी