आगरा। कानपुर नगर निगम की तरह विकास कार्यों के ठेकों में गड़बड़ी के मामले की जांच आगरा नगर निगम ने शुरू कर दी है। ई-टेंडर व्यवस्था में सेंध का पूरे प्रदेश में यह पहला मामला है। नगर आयुक्त ने ई-टेंडर घोटाले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी को 15 दिनों का वक्त दिया है। कमेटी ने बुधवार को निर्माण विभाग से फाइलें तलब की हैं। विभाग से ब्लैकलिस्ट की गई फर्म डीआर कंस्ट्रक्शन के सभी कामों का ब्योरा मांगा है।
लोहामंडी की खटीक बस्ती में टेंडर में बदलाव का यह पहला मामला है। ई-टेंडर की प्रक्रिया में सेंध लगाने वाले जोनल लिपिक को नगर आयुक्त ने निलंबित कर दिया है लेकिन जांच में और भी कर्मचारी और अधिकारी फंस सकते हैं। बुधवार से तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने टेंडर घोटाले की जांच शुरू की। निर्माण विभाग से पूरा ब्योरा तलब किया गया है। निर्माण विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर को भी बदला गया है। नगर आयुक्त की प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि करीब 18 फाइलें ऐसी हैं, जो संदिग्ध हैं।
- ई-टेंडर मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच की जाएगी। अपर नगर आयुक्त की कमेटी से 15 दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। जो फर्म, कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार वैश्य, नगर आयुक्त
एसआईटी से कराई जाए जांच- बसपा
बसपा पार्षदों ने बुधवार को ई-टेंडर मामले के खुलासे के बाद इसकी विस्तृत जांच एसआईटी से कराने की मांग की है। बसपा पार्षद दल नेता कप्तान सिंह ने सभी पार्षदों के साथ प्रेसवार्ता में कहा कि आगरा नगर निगम में कानपुर की तरह से घोटाला हुआ है। ई-टेंडर मामले में लिपिक, ठेकेदारों के साथ अधिकारियाें की भी मिलीभगत है। जो लिपिक निलंबित किया गया, उसके खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई। एसआईटी जांच के आदेश न हुए तो बसपा पार्षद दल आंदोलन करेगा।
सत्ताधारी दल के नेताओं का संरक्षण
बसपा पार्षद सुहैल कुरैशी ने कहा कि ई-टेंडर घोटाले में कई ठेकेदार ऐसे हैं, जिन्हें सत्ताधारी दल के नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है। इसी वजह से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई। नगर आयुक्त ने फर्मों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। मेयर पहले हर मामले में घोटाले के आरोप लगाती थीं लेकिन पांच महीने से उन्होंने मौन साध लिया है।
पांच दिन में दर्ज कराएं प्राथमिकी, अन्यथा धरना
पार्षद रेखा भास्कर, अरविंद मथुरिया, सुनील शर्मा ने नगर आयुक्त को चेतावनी दी कि पांच दिन के अंदर फर्मों और दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई तो नगर निगम में धरना प्रदर्शन करेंगे। आउटसोर्स के कंप्यूटर ऑपरेटरों की जगह दोषी लिपिकों, इंजीनियरों और ठेेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करें। इस दौरान डॉ. यशपाल सिंह, निधि पटेल, प्रीती भारती, पिंकी सोनी, माता प्रसाद, रजनी देवी, किश्वर जहां, सुरेश कुशवाह, मंजू देवी, ऊषा देवी, पुष्पा मौर्य, आसिफ आदि मौजूद रहे।