आगरा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) शारिब अली ने मेसर्स एमएस बर्तन भंडार के साझीदारों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर थानाध्यक्ष हरीपर्वत को विवेचना के आदेश दिए हैं।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की संजय प्लेस शाखा के उप प्रबंधक अरविंद कुमार ने अधिवक्ता के माध्यम से प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। आरोप लगाया था कि सदर थाना क्षेत्र के देवरी रोड निवासी मनोज कुमार और ट्रांस यमुना काॅलोनी फेज-2 निवासी स्नेहलता, रवि कुमार जैन, पुष्पा देवी और अजय जैन ने 26 मार्च, 2019 को मेसर्स एम एस बर्तन भंडार फर्म बनाकर 1.30 करोड़ रुपये का लोन लिया था। इसके लिए उन्होंने अपनी दो अचल संपत्तियां और अन्य दस्तावेज बैंक में बंधक रखे थे। किस्तें जमा न होने पर जांच में धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। पता चला कि अमरकुंज ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित प्लॉट नंबर 35 को पहले भी केनरा बैंक में बंधक रखकर ऋण लिया गया था। एक साझीदार ने लोन की 30 लाख रुपये की धनराशि अपने खाते में स्थानांतरित कर ली थी, जबकि दूसरे साझीदार के आधार कार्ड और पैन कार्ड में जन्मतिथि में अंतर पाया गया।