फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीपीआरओ के आदेश पर भी दर्ज नहीं की घोटाले की एफआईआर

विज्ञापन
विज्ञापन
मैनपुरी। अधिकारियों के आदेश भी पुलिस द्वारा हवा में उड़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कुरावली थाने में आया है। यहां डीपीआरओ के तीन बार पत्र भेजने के बाद भी थानाध्यक्ष ने घोटालेबाज पूर्व प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। परेशान होकर पहले अधिकारी चुप बैठ गए। लेकिन अब फिर एक बार डीपीआरओ ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा है।
विज्ञापन

मामला विकास खंड कुरावली की ग्राम पंचायत बिछिया विक्रमपुर का है। यहां वर्ष 2015-16 में अंत्येष्टि स्थल की 13.09 लाख की धनराशि का गबन सामने आया था। जांच में वर्तमान प्रधान व सचिव के अलावा पूर्व प्रधान पर भी गबन साबित हुआ था। इसमें जांच के बाद पूर्व प्रधान साधना देवी पर 1.69 लाख की रिकवरी के आदेश एक साल पहले जारी किए गए लेकिन न तो पूर्व प्रधान ने रिकवरी जमा कराई और न ही कोई जवाब दिया। इसके बाद डीपीआरओ स्वामीदीन ने एफआईआर के आदेश एडीओ पंचायत कुरावली को दिए। एक के बाद एक तीन बार एफआईआर के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन पुलिस ने थाना कुरावली में एफआईआर दर्ज नहीं की। एडीओ पंचायत रविनेश कुमार खुद कई बार थाने गए, लेकिन हर बार उन्हें लौटा दिया गया। ऐसे में कहीं न कहीं पुलिस घोटालेबाज पूर्व प्रधान को बचाने का प्रयास कर रही है। अब एक बार फिर डीपीआरओ ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए चौथी बार पत्र जारी किया है। अब भी अगर एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो प्रशासन के लिए इससे बदतर और क्या होगा।
वर्तमान प्रधान और सचिव ने जमा कराई रिकवरी
ग्राम पंचायत बिछिया विक्रमपुर में पूर्व प्रधान साधना देवी के अलावा वर्तमान प्रधान कमलेश और सचिव राजीव दुबे ने भी अंत्येष्टि स्थल की धनराशि निकाल ली थी। जांच में वर्तमान प्रधान पर 3.20 लाख और सचिव पर 4.69 लाख की रिकवरी के आदेश दिए गए थे। दोनों के द्वारा एक साल पहले ही रिकवरी की धनराशि जमा कराई जा चुकी है।
विज्ञापन

पहले भी सामने आ चुकी है पुलिस की मनमानी
ये पहली बार नहीं है जब पुलिस द्वारा अधिकारियों के आदेश के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। लगभग चार माह पहले विकास खंड मैनपुरी की ग्राम पंचायत बुर्रा के मामले में भी ऐसा ही हुआ था। यहां प्रधान ने सचिव के फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों की धनराशि निकाली ली थी। मामले में डीपीआरओ ने एफआईआर के आदेश दिए थे। लेकिन सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज नहीं हुआ। अमर उजाला ने इस मामले को प्रकाशित किया था, जिसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी पीके उपाध्याय के हस्क्षेप के बाद एफआईआर दर्ज हुई थी।
किसी भी मामले में पंचायत राज विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। तीन बार एफआईआर के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। एक बार फिर पत्र भेजा जा रहा है, अगर अब भी एफआईआर दर्ज नहीं होती है मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।
विज्ञापन

स्वामीदीन, डीपीआरओ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें