आगरा के थाना सिकंदरा स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में पंच मारकर दसवीं के छात्र के दांत और जबड़ा तोड़ने के मामले में नाबालिग पर प्राथमिकी दर्ज करने में पुलिस फंस गई। घटना के तीसरे दिन सोमवार रात पीड़ित छात्र के पिता की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए नाबालिग छात्र को नामजद किया। सात साल से कम सजा वाले अपराध में बिना किशोर न्याय बोर्ड की रिपोर्ट के नाबालिग पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती, लेकिन पुलिसकर्मियों ने नियमों का पालन नहीं किया। मामला अधिकारियों के पास पहुंचने पर दरोगा और दो पुलिसकर्मी निलंबित कर दिए गए। वहीं थाना प्रभारी निरीक्षक के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश देते हुए नाबालिग पर दर्ज प्राथमिकी को समाप्त कर दिया गया।
लोहामंडी क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित छात्र के पिता का हरीपर्वत क्षेत्र में मोबाइल का शोरूम है। वह सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर भी हैं। उनका बेटा सिकंदरा स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में छात्र है। पिता की ओर से पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में कहा गया है कि शनिवार को उन्हें स्कूल से सूचना मिली कि आपसी विवाद के बाद बेटे को एक छात्र ने बुरी तरह पीटा है, जिससे उसके तीन दांत टूट गए और जबड़े में फ्रैक्चर हो गया। इस वजह से उसको बोलने में भी दिक्कत हो रही है। उसका एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
चिकित्सकों के मुताबिक, अब वह तीन महीने तक कुछ खा भी नहीं सकेगा। ऐसे में उसकी शिक्षा और भविष्य दोनों खतरे में आ गए हैं। बेटे ने लिखकर बताया कि उसे कई पंच मारे गए, जिससे वह बेसुध हो गया। इस घटना के बाद से बेटा स्कूल जाने में भी डर रहा है। मामले में सोमवार रात 2:36 बजे थाना सिकंदरा में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। इसमें 16 वर्षीय छात्र को आरोपी बनाया गया। जो धाराएं लगाई गईं, उनमें स्वेच्छा से मारपीट का आरोप है। इसमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान है।
जीडी में तस्करा कर देनी होती है सोशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि नाबालिग के मामले में किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें प्रावधान है कि गंभीर अपराध न होने पर सीधे प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती। लिखित शिकायत मिलने पर जीडी में तस्करा डाला जाना चाहिए। इसके बाद सोशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट दी जाती है। किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष नामजद किशोर को पेश किया जाता है और बोर्ड के आदेश के बाद आगे की कार्रवाई होती है। बोर्ड को ही तय करना होता है कि इस तरह के मामलों में प्राथमिकी दर्ज होगी या फिर काउंसिलिंग की जाएगी या मामला समाप्त किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर बाल कल्याण अधिकारी दरोगा मनीपाल सिंह, प्राथमिकी लिखने वाले मुंशी कमल चंदेल और सिपाही सनी धामा को निलंबित किया गया है। वहीं थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार त्रिपाठी की लापरवाही भी सामने आई है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।