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यूपी: आगरा में हाॅस्पिटल संचालक सहित पांच पर एफआईआर, दो चिकित्सक भी नामजद; फर्जी मेडिकल का मामला

Thu, 10 Sep 2026 08:32 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

यूपी के आगरा जिले में अस्पताल संचालक समेत पांच लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें दो चिकित्सक भी शामिल हैं। पुलिस अब मामले की जांच में जुटी है।
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Fir demo - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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आगरा के एत्माद्दाैला थाने में ट्रांस यमुना ए ब्लाक स्थित जेडी हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी के डाॅ. एसके सिंह, डाॅ. आलोक गुप्ता और संचालक सहित पांच के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अछनेरा के गांव कुकथला निवासी अधिवक्ता संतोष बाबू ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया था। आरोप लगाया कि उन्हें फंसाने के लिए फर्जी तरीके से मेडिकल कराया गया।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि 28 अक्तूबर 2021 को अनिल कुमार ने उनके खिलाफ थाना अछनेरा में मारपीट व गालीगलाैज के आरोप में रिपोर्ट (एनसीआर) दर्ज कराई थी। बाद में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। इसमें विवेचक ने धारा 325 (स्वेच्छापूर्वक गंभीर चोट पहुंचाना) का लोप कर दिया। धारा 308 (गैर इरादतन हत्या की कोशिश) की वृदि्ध कर आरोपपत्र दाखिल कर दिया। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

अधिवक्ता का कहना है कि अनिल ने घटना 28 अक्तूबर 2021 की सुबह 9:45 बजे की बताई। सात घंटे बाद जेडी हाॅस्पिटल में भर्ती होना दर्शाया, जिसमें 8 नवंबर 2021 तक इलाज चला। 30 मई, 2023 को अनिल ने उनके जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध करने के लिए मेडिकल संबंधी दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत किए। यह प्रपत्र विवेचक ने विवेचना में शामिल नहीं किए थे।
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प्रपत्र के मुताबिक, वो 11 दिन निजी अस्पताल में था। इसमें सात दिन आईसीयू में रहे। हकीकत में अनिल ने 29 अक्तूबर 2021 को जिला अस्पताल में एक्सरे कराया था। उसकी रिसीविंग भी ली थी। घटना के पांच दिन बाद सीटी स्कैन भी कराया। मामले में डीएम ने शिकायत पर एसएन मेडिकल काॅलेज की टीम से अनिल का दोबारा मेडिकल कराया। किसी तरह का फ्रैक्चर और खून का थक्का जमने की पुष्टि नहीं हुई। अनिल की रिपोर्ट सामान्य आई थी।

अधिवक्ता का आरोप है कि उपचार से संबंधित दस्तावेज के लिए जेडी हाॅस्पिटल से आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी लेकिन मगर आज तक सूचना नहीं दी गई। प्रथम और द्वितीय अपीलीय अधिकारी को भी प्रार्थनापत्र दिए, फिर भी सूचना नहीं मिली। आरोप लगाया कि अनिल ने खुद ही जिला अस्पताल में मेडिकल कराया। बाद में सीटी स्कैन के लिए भी गया। यह तब किया जब 28 अक्तूबर को ही पुलिस ने उसे मजरूबी चिट्ठी दी थी। उन्हें पूरा शक है कि साजिश के तहत यह सब किया गया। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास का कहना है कि मामला फर्जी मेडिकल कराकर फंसाने का है। मामले में साक्ष्य संकलन के आधार पर ही कार्रवाई होगी।

जेडी हाॅस्पिटल के फिजिशियन डाॅ. एसके सिंह ने बताया कि पारिवारिक झगड़े में एक व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसका भाई उसे लेकर आया था। साथ में मेडिकल से संबंधित दस्तावेज भी थे। इस पर घायल का उपचार किया गया। उनके पास सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं। वह साक्ष्य विवेचक के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।




 
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