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व्यवस्था की लाचारी- मजरूमी चिट्ठी के इंतजार में अस्पताल के बाहर इलाज को तड़पती रही महिला

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कासगंज। पुलिस की अनदेखी और स्वास्थ्य महकमे की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। ऐसा ही एक उदाहरण सोमवार को सामने आया है। कागजी औपचारिकता पूरी न होने पर एक मारपीट में गंभीर रूप से घायल एक महिला इलाज के लिए अस्पताल के बाहर घंटों तड़पती रही। सुन्नगढ़ी थाना पुलिस और जिला अस्पताल के चिकित्सक एक दूसरे को नियमों का हवाला देकर टालते रहे। सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंची महिला का चार बजे इलाज शुरू हो सका।
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सुन्नगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव चिरौली निवासी संतोषी देवी पत्नी रविंद्र सुबह 7 बजे अपनी गली से भैंस लेकर गुजर रही थी। सामने गांव के ही छत्रपाल की बाइक खड़ी थी। उन्होंने बाइक हटाने को कहा तो विवाद हो गया। छत्रपाल, नेकराम और सौरभ ने महिला की बेरहमी से पिटाई कर दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। गंभीर हालत में महिला को गंजडुंडवारा सीएचसी ले जाया गया।
वहां से उसे कासगंज जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां महिला पहुंची और घटनाक्रम बताया तो चिकित्सकों ने पुलिस की मजरूमी चिट्ठी मांगी। जबकि महिला का पति रविंद्र महिला को सीधे अस्पताल ले गया था इसलिए मजरूमी चिट्ठ नहीं थी। उसने पुलिस से संपर्क किया। सुन्नगढ़ी थानाध्यक्ष ने चिकित्सक से बातचीत की।
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चिकित्सक ने हवाला दिया कि बिना मजरूम चिट्ठी के मारपीट में घायल महिला का मेडिकल नहीं किया जा सकता। जबकि थानाध्यक्ष अपनी बात पर अड़े रहे। सुबह 9 बजे अस्पताल पहुंची महिला को शाम 4 बजे तक तड़पती रही। इसके बाद उच्चाधिकारियों को जानकारी मिली तब उसका इलाज किया गया।
- महिला थाने न आकर सीधे इलाज को चली गई। चिकित्सकों को घायल का इलाज करना चाहिए। मारपीट का मुकदमा लिखने में बिलंब है। इलाज में बिलंब नहीं होना चाहिए। - राजेश मीना, थाना प्रभारी, सुन्नगढ़ी।
- महिला को प्राथमिक उपचार दिया गया। मारपीट की मेडिकल रिपोर्ट मजरूमी चिट्ठी के आधार पर ही तैयार होती है। उसके लिए चिट्ठी की जरूरत है।- डॉ. वीके राजपूत, चिकित्साधीक्षक।
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