सवा करोड़ से ज्यादा सैलानी हर साल जिस ताजमहल की एक झलक पाने को बेचैन रहते हों, उसी ताजमहल के शहर का आसमान सूना है। ताजनगरी में हवाई उड़ान सेवा बंद पड़ी है, वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने का रास्ता भी बंद करने का प्रयास हो रहा है। दिल्ली लॉबी के दबाव में जेवर में एयरपोर्ट बनाने की तैयारी है, जबकि पहला हक आगरा का है। जेवर में एयरपोर्ट बनाने के खिलाफ शहर के पर्यटन उद्योग ने कड़े तेवर अपनाए हैं।
बसपा सरकार के समय जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की तैयारी हुई, लेकिन सपा सरकार में उम्मीदें आगरा में परवान चढ़ीं। अब केंद्र की मोदी सरकार के मंत्री डा. महेश शर्मा ने जेवर में एयरपोर्ट का समर्थन कर विवाद को जन्म दे दिया है। फतेहपुर सीकरी के सांसद चौ. बाबूलाल सीकरी-आगरा के बीच एयरपोर्ट के लिए जमीन दिलाने की पैरवी भी कर रहे हैं, ऐसे में जेवर में एयरपोर्ट बनाने के फैसले के खिलाफ पर्यटन उद्यमियों ने आवाज उठाई है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चौहान ने कहा कि आगरा के उद्यमी प्रधानमंत्री से मिलकर एयरपोर्ट पर अपना हक जताएंगे, वहीं टूरिज्म गिल्ड सचिव राजीव सक्सेना ने कहा कि आगरा में एयरपोर्ट की जरूरत ज्यादा है। इससे देश के पर्यटन को फायदा होगा। जेवर के लिए गिल्ड अपनी आपत्ति जताएगा।
आगरा से छिनी इकलौती उड़ान भी
26 दिसंबर 2012 को दिल्ली-वाराणसी-आगरा-खजुराहो के लिए एयर इंडिया ने सप्ताह में तीन दिन विमान सेवा शुरू की थी, लेकिन 6 अप्रैल से वह भी बंद हो चुकी है। तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने खेरिया हवाई अड्डे से एयर इंडिया की फ्लाइट की शुरुआत की थी। करीब 16 हजार सैलानियों ने बीते साल इस उड़ान का लाभ उठाया। एयर इंडिया के लिए भी इस उड़ान की आक्यूपेंसी 70 फीसदी से ज्यादा रही। एयर इंडिया की मुंबई-आगरा उड़ान सेवा साल 2013 में तीन महीने चलने के बाद पहले ही बंद हो चुकी है। इन दोनों उड़ानों की बंदी के लिए एयर इंडिया विमानों और यात्रियों की कमी को वजह बता रही है, जबकि हर साल आगरा में 750 से ज्यादा चार्टर प्लेन दुनिया भर से सैलानियों को आगरा लेकर आ रहे हैं।
कठेरिया ने एक साल में एयरपोर्ट का किया था वादा
बीते साल केंद्र में मोदी सरकार आते ही सांसद डा. रामशंकर कठेरिया ने वादा किया था कि एक साल के अंदर सिविल एयरपोर्ट बनकर तैयार हो जाएगा और हवाई उड़ानों के जरिए आगरा देश के बड़े शहरों से जुड़ भी जाएगा। बंपर जीत से सांसद चुने गए कठेरिया केंद्र में मानव संसाधन राज्य मंत्री भी बन गए, लेकिन एक साल में पूरे होने वाले इस वादे को याद न रख पाए।
55.29 एकड़ में बनना है सिविल एयरपोर्ट
आगरा। तीन साल से आगरा के खेरिया एयरपोर्ट पर धनौली की ओर से सिविल एयरपोर्ट बनाने की फाइल दौड़ रही है, लेकिन सिविल एयरपोर्ट के लिए नींव तक नहीं खोदी जा सकी। 55.29 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित सिविल एयरपोर्ट के लिए किसान अपनी जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन कुछ हिस्से की जमीन को लेकर प्रशासन आनाकानी कर रहा है। खेरिया का मौजूदा टर्मिनल 4395 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में है और 5 चेक इन काउंटर के साथ 3 इमीग्रेशन और 4 कस्टम काउंटर हैं। कैट-1 से लैस खेरिया एयरपोर्ट पर बोइंग-737 और एयरबस-320 जैसे बड़े विमान उतर सकते हैं।
शटल सेवा से भी नहीं जुड़ पाए शहर
आगरा। प्रदेश सरकार ने अंर्तराज्यीय शहरों के बीच हवाई उड़ान सेवा शुरू करने के लिए नार्थ ईस्ट शटल कंपनी के साथ करार भी किया। अप्रैल के पहले सप्ताह में इलाहाबाद-लखनऊ और लखनऊ-आगरा के बीच उड़ान शुरू होनी थी, लेकिन एमओयू साइन होने के बाद भी यह चालू नहीं हो सकी। प्रदेश सरकार ने एयर टर्बाइन फ्यूल पर वैट की दर भी 22 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी कर दी, लेेकिन हवाई सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों ने प्रदेश के शहरों को जोड़ने की योजना में रुचि नहीं दिखाई।