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बुखार के मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या, बच्चे हो रहे बीमार

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एटा। इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक बुखार से पीड़ित बच्चे व मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। हाल ही में सात दिन के अंदर बुखार की वजह से दो बच्चों की मौत भी हो चुकी है। बुखार जानलेवा होता जा रहा है और इसके मुकाबले के लिए मुकम्मल व्यवस्थाएं नहीं हो पा रहीं हैं। चिकित्सक मौसम में हो रहे बदलाव की वजह से बुखार बढ़ने की बात कह रहे हैं। ओपीडी में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सोमवार को कुल ओपीडी 1100 मरीजों की रही। जिसमें 200 बीमार बच्चे थे।
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आमतौर पर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 700 तक मरीज पहुंच रहे थे लेकिन सोमवार को मरीजों की संख्या 1100 तक पहुंच गई। इसमें करीब 200 बीमार बच्चे शामिल रहे। ओपीडी के अलावा बुखार के पीड़ित मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में भी सेवाएं लेनी पड़ीं। रविवार रात घिलौआ निवासी ऊषा देवी और इनके सात वर्षीय पुत्र अनीस को तेज बुखार आने पर इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने पर परिजन निजी चिकित्सक के पास ले गए। जबकि थाना पिलुआ क्षेत्र के गांव कंचनगढ़ी निवासी विकास के साढ़े तीन वर्षीय पुत्र वेदांश को भी बुखार आने पर इमरजेंसी रात 12 बजे भर्ती कराया गया। जबकि रिजोर क्षेत्र के गांव मिर्जापुर सई निवासी सरोज देवी को बुखार आने पर इमरजेंसी में भर्ती कराकर उपचार दिया गया।
बुखार की वजह से ही नगला भिखारी निवासी छह वर्षीय गोपाल, शिवसिंहपुर निवासी चार वर्षीय मयंक, नई बस्ती निवासी आठ वर्षीय प्रियंका, नन्नूमल चौराहा निवासी पांच वर्षीय वंश और आठ वर्षीय परी को परिजनों ने एमसीएच विंग में भर्ती करके उपचार कराया। बता दें कि बुखार की वजह से 30 जुलाई को निधौली कलां क्षेत्र के गांव नगला फकीर निवासी मुकेश कुमार की चार वर्षीय बेटी मन्नू और 5 अगस्त को जलेसर क्षेत्र के गांव बेरनी निवासी नरेश कुमार की आठ वर्षीय बेटी पल्लवी की मौत हो चुकी है।
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बुखार की वजह से नाती गोपाल काफी परेशान हो गया था। मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर उपचार कराया है। अब स्वास्थ्य लाभ मिल गया है। -महेश चंद्र, नगला भिखारी
गांव में बुखार से काफी बच्चे बीमार हैं। मेरा बेटा मयंक बुखार से बहुत ज्यादा परेशान हुआ तो मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया, अब सही है। -चंद्रवती, गांव शिवसिंहपुर
मौसम में बदलाव आने की वजह से बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बच्चों पर मौसम बदलने का ज्यादा असर होता है, इसकी वजह से बुखार, सर्दी-जुकाम से परेशान हो जाते हैं। बच्चों को बुखार आने पर कुशल चिकित्सक से ही उपचार कराना चाहिए। -डॉ. एबी सिंह, पीडियाट्रिक नोडल अधिकारी
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