मुरैना-धौलपुर के बीच ट्रेन में आग की अफवाह फैलने के बाद मची भगदड़ में आफरीन और उनके चार वर्षीय बेटे असद की दूसरी ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई। बेटे को लेने गया पति नदीम अपनी पत्नी और बच्चे को बचा नहीं सका, जबकि हादसे का खौफनाक मंजर उसकी आंखों के सामने घटित हुआ।
जिस बेटे की याद में परेशान होकर उसे लेने गया, आंखों के सामने उसकी ही जान चली गई। खजुराहो से उदयपुर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग की अफवाह के चलते ट्रेन से उतरते समय दूसरी ट्रेन की चपेट में आए मृतकाें के शव घर पहुंचने पर परिवार के लोग बिलख पड़े। आंखों के सामने 4 वर्ष के बेटे और पत्नी की मौत के बाद पति नदीम के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। परिजन और परिचिताें ने ढाढ़स बंधवाकर अंतिम संस्कार करवाया।
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घर पर मौजूद महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रविवार दोपहर इंटरसिटी एक्सप्रेस के एक डिब्बे में यात्री के मोबाइल में धमाका हुआ था। इसके बाद ट्रेन में आग लगने की अफवाह फैल गई। मुरैना और धौलपुर के बीच हेतमपुर स्टेशन के पास यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोक लिया। ट्रेन से उतरने के दौरान दूसरे ट्रैक पर आ रही पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में कई यात्री आ गए। हादसे में रुनकता निवासी 60 वर्षीय शकुंतला देवी, नई आबादी कर्बला निवासी 35 वर्षीय आफरीन और उनके 4 वर्षीय बेटे असद की मौत हो गई।
सोमवार को सुबह सभी के शव उनके घर पहुंचे तो चीख-पुकार मच गई। आफरीन के पति नदीम ने बताया कि वह मजदूरी कर परिवार पालते हैं। पत्नी अपनी मां की तबीयत खराब होने पर सप्ताह भर पहले बच्चों के साथ मायके गई थी। छोटे बेटे असद की याद आ रही थी । शनिवार को वह तीनों को लेने गए थे। ट्रेन में आग की अफवाह फैलने पर उन्होंने पहले आफरीन और असद को नीचे उतारा। इसके बाद बड़े बेटे 10 वर्षीय रिजवान को ट्रेन में तलाशने लगे। लौटे तो उनकी आंखों के सामने मां-बेटा दोनों ट्रेन की चपेट में आ गए। वह खौफनाक मंजर उनकी आंंखों के सामने नाच रहा है। रिजवान गम में कुछ बोल नहीं पा रहा है। रिश्तेदारों ने सांत्वना दी और अंतिम संस्कार कराया।
बेटे को बचाया पर मां को नहीं बचा सकी
हादसे में रुनकता निवासी शकुंतला देवी का सोमवार को कस्बे में ही अंतिम संस्कार किया गया। हादसे के बाद उनका 10 वर्षीय धेवता गुन्नू अब तक दहशत में है। थोड़ी-थोड़ी देर में नानी को याद कर रहा है। हादसे के समय साथ रही गुड्डी देवी ने बताया कि ट्रेन से उतरते समय मां शकुंतला अपने धेवते गुन्नू का हाथ पकड़े थीं। ट्रेन की चपेट में आता देख उन्होंने गुन्नू का हाथ पकड़ कर खींच लिया था। मां को ट्रैक से हटने के लिए जोर से आवाज दी थी पर उनके संभलने से पहले ट्रेन ने उन्हें चपेट में ले लिया।