ऐसे निकालते थे खातों से रकम
आरोपी बैंक में जाकर लिपिक के पास रखे चेक की वीडियो बनाते थे। उसके बाद इन चेक की वीडियो का स्क्रीनशॉट लेते थे। खाता संख्या और नाम आने के बाद मजदूरों को 10 हजार की नौकरी का झांसा देते थे। मजदूर के आधार कार्ड और अन्य प्रमुख कागजात लेने के बाद यह जालसाज एक बैग, पैन और रजिस्टर देकर इनके नाम से बैंक में खाता खुलवाते थे।
उस बैंक की चेक बुक जारी कराकर उसके ऊपर से मजदूर का खाता संख्या और नाम को हटाकर बनाई वीडियो के चेक का नाम और खाता संख्या डालकर हूबहू हस्ताक्षर भी बना लेते थे। इसके बाद चेक लगाकर मजदूर के खाते में रकम को आरटीजीएस करा देते थे। मजदूर के खाते से दूसरे जिले में जाकर रकम को निकाल लेते थे। दोनों जालसाज नए-नए मजदूरों को भी अपना शिकार बनाते थे।
इन राज्यों के लोग हुए जालसाजों का शिकार
जालसाज पिता-पुत्र ने यूपी के मथुरा, आगरा, टूंडला, हाथरस, चित्रकूट, एमपी के मुरैना, भिंड, ग्वालियर, हरियाणा के पलवल, होडल, राजस्थान के अलवर, जयपुर, भरतपुर, उत्तराखंड के देहरादून निवासी लोगों के खातों से रकम निकाली है।
कई बार जेल जा चुका है कंचन सिंह
साइबर सेल प्रभारी नितिन कसाना ने बताया कि 1994 में आगरा की नाई की मंडी और आगरा के एत्माद्दौला से जालसाज कंचन सिंह जेल जा चुका है। इसके अलावा 15 साल पहले शहर कोतवाली पुलिस ने भी इसे चेक के मामले में जेल भेजा था। हालांकि अभी तक पांच राज्यों में इनके जालसाजी का रिकॉर्ड मिला है।
इसके अलावा भी अन्य और जिलों में भी आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। फिलहाल पिता-पुत्र जालसाजी का ही कार्य कर रहे थे, पर दिखाने के लिए बिल्डिंग मैटेरियल और पशुओं के चारे का व्यवसाय खोल रखा है। अंडर ट्रेनी सीओ हर्षिता सिंह ने भी इन जालसाजों से जानकारी जुटाई है।
यह हुई बरामदगी
आरोपियों से एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड, पांच आधार कार्ड, विभिन्न बैंकों की 30 चेकबुक, बैंकों के अधबने चेक व जमा निकासी बाउचर, आठ नए सिम कार्ड, विभिन्न कंपनियों के 13 कीपैड फोन, दो मल्टीमीडिया फोन, 5800 रुपये नकदी, एक कार बरामद हुई है।