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कंपनी का आकर्षक पैकेज छोड़ खेतीबाड़ी कर रहे विनोद, किसानों को समझा रहे मुनाफे का गणित

Mon, 27 May 2019 11:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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खेत में किसान विनोद कुमार - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली की एक इंश्योरेंस कंपनी में मोटे पैकेज को छोड़कर फतेहपुर सीकरी के विनोद कुमार खेती कर रहे हैं। सब्जी और फलों की खेती के साथ ही उन्होंने मछली पालन भी शुरू कर दिया है। वो किसानों को अलग-अलग खेती कर मुनाफे का गणित भी समझा रहे हैं। उनके मुताबिक, लागत से डेढ़ से दो गुना कमाई कर लेते हैं। 
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फतेहपुर सीकरी के मंगोली कला निवासी विनोद कुमार एमबीए कर दिल्ली की इश्योरेंस कंपनी में नौकरी करते थे। उनके हिस्से में साढ़े आठ एकड़ जमीन है। समाचार पत्रों में किसानों की बदहाली और आत्महत्या की खबरें पढ़ने के बाद उन्होंने खेती करने का निर्णय लिया। 

परिवार और पत्नी ने भी इतने बड़े पैकेज की नौकरी छोड़ने से मना किया। लेकिन उन्होंने किसी की नहीं मानी और जैविक खेती करनी शुरू कर दी। टिंडा, करेले, लौकी, गोभी समेत अन्य सब्जी उगाकर दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम समेत अन्य शहरों की मंडी और होटलों में सप्लाई करते हैं।
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फूलों की खेती से भी कमाई

गेंदा के फूलों की भी खेती करते हैं, जिसकी दिवाली पर बिक्री कर अच्छी कमाई हो जाती है। मुनाफा होने पर उन्होंने तीन एकड़ में केला और पपीता की खेती भी शुरू कर दी है। विनोद कुमार बताते हैं कि एक साल में वह तीन फसल प्राप्त कर लेते हैं। 

जैविक खेती से खर्चा कम और मुनाफा ज्यादा है। कहा कि फसल में मुनाफा तब ज्यादा होता है, जब उसे अच्छा बाजार मिले। अधिकांश किसान अपनी फसल मेट्रो शहर में न भेजकर आसपास ही खपा देते हैं, जिससे अच्छी कीमत नहीं मिल पाती।

मछली पालन में दो गुना तक बचत 

विनोद कुमार ने अपने खेत में आधे एकड़ में मछली पालन के लिए तालाब बनवाया है। इसमें उन्होंने मछली पालन शुरू कर दिया है। बताया कि आठ से दस महीने में मछली बिक्री लायक तैयार हो जाती है। 

विनोद बताते हैं कि तालाब बनवाने समेत करीब साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च आता है। मछली के दाम साढ़े पांच से साढ़े छह लाख रुपये तक मिल जाते हैं। मछली को दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा समेत आसपास की मंडी में भेजते हैं। अब होटलों से भी सीधे आर्डर आ जाते हैं। इस तरह से एक बार में दो से ढाई लाख रुपये बच जाते हैं। 
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