फतेहपुर सीकरी में मुख्य स्मारकों के दूरदराज क्षेत्र में स्थित संरक्षित स्मारकों का संरक्षण तो दूर रखरखाव भी रामभरोसे है। मुगल शासक और राजपूत राजाओं के मध्य हुई संधि के बाद सीकरी में बनवाया गया हाणा महल (खुश खास) भी पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते दुर्दशा का शिकार है। कहने को तो इन स्मारकों पर स्मारक परिचरों की तैनाती है, लेकिन स्मारक की हालत देखकर नहीं लगता कि कोई कर्मचारी इधर आता है।
लार्ड कर्जन के समय में सीकरी स्मारकों की सर्वेयर एडमंड डब्ल्यू स्मिथ ने अपनी सर्वे रिपोर्ट ‘मुगल आर्किटेक्चर ऑफ फतेहपुर सीकरी’ में लिखा है कि यह महल बूंदी के राजपूत राजाओं के अकबर के समक्ष समर्पण के बाद हुई संधि के बाद हाणा राजाओं ने बनवाया था।
विसेंट स्मिथ ने अपनी पुस्तक ‘अकबर-द ग्रेट मुगल’ में लिखा है कि 1569 ईसवी में मुगल शासक अकबर ने बूंदी स्टेट के चारों ओर अपनी सेना लगा दी थी। स्थिति ऐसी थी कि युद्ध कितना लंबा चलेगा कोई कह नहीं सकता था। कूटनीतिक चाल चली गईं और बूंदी के राजा सूरजनमल हाणा का समर्पण हुआ।