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पर्यटक अपार-धरोहरें बेहाल: फतेहपुर सीकरी में हाणा महल दुर्दशा का शिकार, यह है इतिहास

Sun, 22 Nov 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • मुगल शासक और राजपूत राजाओं के मध्य संधि के बाद कराया गया था हाणा महल का निर्माण
  • हाणा महल खुश खास के नाम से भी जाना जाता है
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खंडहर में तब्दील हुआ हाणा महल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फतेहपुर सीकरी में मुख्य स्मारकों के दूरदराज क्षेत्र में स्थित संरक्षित स्मारकों का संरक्षण तो दूर रखरखाव भी रामभरोसे है। मुगल शासक और राजपूत राजाओं के मध्य हुई संधि के बाद सीकरी में बनवाया गया हाणा महल (खुश खास) भी पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते दुर्दशा का शिकार है। कहने को तो इन स्मारकों पर स्मारक परिचरों की तैनाती है, लेकिन स्मारक की हालत देखकर नहीं लगता कि कोई कर्मचारी इधर आता है।

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लार्ड कर्जन के समय में सीकरी स्मारकों की सर्वेयर एडमंड डब्ल्यू स्मिथ ने अपनी सर्वे रिपोर्ट ‘मुगल आर्किटेक्चर ऑफ फतेहपुर सीकरी’ में लिखा है कि यह महल बूंदी के राजपूत राजाओं के अकबर के समक्ष समर्पण के बाद हुई संधि के बाद हाणा राजाओं ने बनवाया था। 


विसेंट स्मिथ ने अपनी पुस्तक ‘अकबर-द ग्रेट मुगल’ में लिखा है कि 1569 ईसवी में मुगल शासक अकबर ने बूंदी स्टेट के चारों ओर अपनी सेना लगा दी थी। स्थिति ऐसी थी कि युद्ध कितना लंबा चलेगा कोई कह नहीं सकता था। कूटनीतिक चाल चली गईं और बूंदी के राजा सूरजनमल हाणा का समर्पण हुआ। 

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जयपुर के राजा मानसिंह की मध्यस्थता में हुई संधि में शर्तें थीं कि हाणाओं पर जजिया कर नहीं लगेगा, वे दरबार में अपने राजसी चिन्ह के साथ बैठेंगे। अन्य हिंदू राजाओं के अधीन नहीं होंगे। उनकी फौज के घोड़ों पर मनसबदारी नहीं लगेगी। इसी संधि के बाद सीकरी आए हाणा राजा को चहारदीवारी के अंतिम किनारे बने महल में ठहराया गया। उसके बाद हाणाओं ने एक महल अपने लिए बनवाया। जिसका नाम हाणा महल पड़ा। 

यहां स्थित है
मुगलकालीन स्मारक हाड़ा महल (खुश खास) मुख्य स्मारकों से 2 किलोमीटर दूर पतसाल मार्ग पर स्थित है। 

लाल पत्थर पर कारीगरी
करीब 450 वर्ष पूर्व बने हाणा महल में चारों ओर दरवाजे और विशाल बरामदे हैं। लाल पत्थर पर उत्कृष्ट कारीगरी की गई है। 

यह है हाल
स्मारक के चारों ओर बने छज्जे टूट चुके हैं। बरामदे खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। चारों ओर कंटीली झाड़ियां उगी हुई हैं। यहां पहुंचने का मार्ग भी ऊबड़खाबड़ है।
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