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जैविक खाद पर जोर, जिले में 160 वर्मी कंपोस्ट यूनिट और खुलेंगी

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एटा। जैविक खाद का उपयोग और किसानों को प्रेरित करने पर जोर दिया जा रहा है। जैविक खाद उत्पादन करने के लिए पहले से जिले में कृषि विभाग की ओर से वर्मी कंपोस्ट यूनिटों की संख्या चार सौ के करीब है। हालांकि अब विभाग किसानों को वर्मी कंपोस्ट लगाकर जैविक खाद तैयार करने की विधियां बताने के साथ-साथ वर्मी कंपोस्ट यूनिटों को बढ़ाने के प्रयास में जुटा है।
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किसानों को रासायनिक खादों के बढ़ते चलन पर रोक लगाने के लिए सरकार वर्मी कंपोस्ट यूनिटों से तैयार जैविक खाद पर जोर दे रही है। तीन वर्ष पहले जैविक खाद बनाने के लिए वर्मी कंपोस्ट यूनिटों की शुरूआत की गई थी। वर्मी कंपोस्ट यूनिटों से तैयार जैविक खाद का बेहतर प्रदर्शन सामने आने पर सरकार और कृषि विभाग किसानों को प्रेरित करने में जुटे हैं। जिले में 2018-19 में 400 के करीब वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाई जा चुकी हैं और इनमें तैयार खाद को किसान उपयोग कर रहे हैं। इस वर्ष 160 वर्मी यूनिटों को लगाने की तैयारियां की जा रही हैं, जिससे किसान अधिक से अधिक मात्रा में जैविक खाद का उपयोग कर सकें। प्रत्येक यूनिट पर किसान को सरकार की ओर से 75 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है।
जैविक खेती किसानों के लिए हर मायने में फायदेमंद है। जैविक खेती से उत्पादित फसलों और सब्जियों को लोग अधिक कीमत में खरीदते हैं। इससे किसानों को लाभ होता है और खेती में लागत भी कम आती है। किसानों के लिए सरकारी वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगवा रही है। इस पर छह हजार का अनुदान भी है।
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विजय शंकर, उप कृषि निदेशक
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