बिचपुरी। जनपद में खेतों में असंतुलित खाद के प्रयोग से मिट्टी की सेहत लगातार बिगड़ रही है। इससे पोषक तत्वों की उपलब्धता घट रही है और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार आगरा क्षेत्र की मृदा का पीएच सामान्यतः 7.8 से 8.5 के बीच रहता है। इससे जिंक, लोहा और फास्फोरस जैसे आवश्यक तत्व पौधों को पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के मृदा विशेषज्ञ संदीप सिंह ने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने से न केवल खेती की लागत कम होती है, बल्कि उत्पादन में भी वृद्धि होती है। डॉ. सिंह ने कहा कि किसान एक खेत से 10 से 12 अलग-अलग स्थानों पर ‘V’ आकार के लगभग 8 इंच गहरे गड्ढे बनाएं। गड्ढे की एक साइड से ऊपर से नीचे तक 2-3 सेंटीमीटर मोटाई की मिट्टी की परत काटकर निकालें। सभी स्थानों की मिट्टी को एक साफ बर्तन में इकट्ठा कर अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद जड़, कंकड़ व अन्य अवांछित पदार्थ हटाकर मिट्टी को चार बराबर भागों में बांटें और यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं, जब तक लगभग 500 ग्राम मिट्टी शेष न रह जाए। नमूने को छाया में सुखाकर साफ कपड़े या पॉलिथीन बैग में सुरक्षित रखें। साथ ही नमूने पर किसान अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, खेत की पहचान और संग्रह की तारीख अवश्य लिखें। संवाद
इन जगहों से न लें नमूना
डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि मेड़, पानी की नाली, कम्पोस्ट के ढेर या पेड़ की जड़ के पास से नमूना न लें। खाद के बोरे में मिट्टी न रखें और खड़ी फसल या हाल ही में उर्वरक प्रयोग किए गए खेत से भी नमूना लेने से बचें। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में मिट्टी की जांच निशुल्क की जा रही है, जिसकी रिपोर्ट 10 से 15 दिन में उपलब्ध हो जाती है।
मृदा परीक्षण से मिला लाभ
एत्मादपुर के गांव शेखपुरा के किसान लाखन सिंह त्यागी ने बताया कि उन्होंने दो एकड़ खेत में गेहूं की फसल के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे उनकी लागत घटी और उत्पादन में 15 से 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।